डेराबस्सी। तहसील में फर्जी एनओसी के आधार पर अवैध कॉलोनियों में प्राॅपर्टी की रजिस्ट्री करवाने के मामले में नगर परिषद ने फर्जी एनओसी का रिकाॅर्ड पुलिस को सौंप दिया है। जांच के बाद जल्द ही इस गिरोह में शामिल आरोपियों के नाम सामने आ जाएंगे। दरअसल अमर उजाला ने सबसे पहले यह मामला उठाया था और इसके बाद एक फर्जी एनओसी का खुलासा होने पर लालड़ू में भी खुलासे हुए हैं। इस मामले में पुलिस ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र जैन की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस संबंधी कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र जैन ने शिकायत में कहा था कि इस साल जनवरी से अगस्त तक रजिस्ट्रियों की जांच करने पर 169 फर्जी एनओसी, चार नक्शे और दो ऑफ लाइन परमिट पाए गए हैं, जो नगर परिषद की ओर से जारी नहीं किए गए थे। इससे नगर परिषद को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
इस संबंधी एएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि इस मामले में नगर परिषद की ओर से पुलिस को रिकाॅर्ड सौंप दिया गया है, जिसकी जांच की जा रही है। पिछले दो महीने का रिकॉर्ड जांचा जाएगा और जो नाम सामने आते रहेंगे, उन्हें नामांकित किया जाता रहेगा। प्रारंभिक जांच में कुछ अर्जी नवीस, अस्टाम फरोश और कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा।
पिछले रिकॉर्ड से किया जाएगा मिलान
शहर में चर्चा है कि मामला तूल पकड़ता देख राजस्व विभाग के अधिकारियों ने तहसील में जमा रिकॉर्ड से कुछ लोगों को बचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी एनओसी और अन्य दस्तावेज बाहर निकाल दिए हैं। इस मामले में एएसपी डॉ. दर्पण कौर आहलूवालिया ने कहा कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा। नगर परिषद और गमाडा की ओर से जारी की गई एनओसी के रिकाॅर्ड का मिलान पिछले समय में हुई रजिस्ट्रियों के साथ किया जाएगा, जिससे दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।