भगवंत मान की बहन मनप्रीत कौर व मां हरपाल कौर।
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भाई भगवंत मान को सीएम का चेहरा घोषित किया गया तो छोटी बहन और मां की आंखें छलक पड़ीं। मंच पर बैठे भगवंत मान भावुक हुए तो केजरीवाल ने उन्हें संभाला। भगवंत मान की बहन मनप्रीत कौर ने कहा कि उसे विश्वास है इसलिए वह खुद लोगों से वादा करती हैं कि अगर यह लड़ाई उनका भाई जीता तो सबके चेहरे पर मुस्कान लाएगा।
मनप्रीत ने कहा कि वह खुशनसीब है कि उनके भाई को पार्टी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि हम आम घर में पैदा हुए हैं। सुख दुख सब कुछ देखा है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान ने 20 साल के कॉमेडी के करिअर में भी लोगों के मुद्दों को मंच से उठाया। उनके परिवार से किसी ने पंच का चुनाव तक नहीं लड़ा है।
हम चुनाव लड़ने से डरते थे। हालांकि भाई का कहना था कि लोगों के चेहरे हंसी उस समय आती है, जब उनका पेट भरा होता है, भूखे पेट चेहरे पर हंसी नहीं आती है। ऐसे लोगों को चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए राजनीति में उतरना ही पड़ेगा। बकौल मनप्रीत, वह खुद पटियाला के एक निजी स्कूल में काम करती हैं।
उनके स्कूल से मोती महल आधा किलोमीटर दूर है। वहां कोई दिन नहीं जाता, जब लाठीचार्ज न हुआ हो। उन्होंने कहा कि मैं वादा करती हूं कि यह लड़ाई जब जीतेंगे तो मेरा भाई सबके चेहरे पर मुस्कान लेकर आएगा, क्योंकि मेरे भाई ने रंगला पंजाब बनाने का जो सपना देखा है, उसके लिए सबके सहयोग की जरूरत है।
पिता ने सिखाई थी राजनीति
मनप्रीत कौर ने कहा कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अगर आज वह जिंदा होते तो काफी खुश होते। क्योंकि उनकी राजनीति में काफी रुचि थी। वह राजनीति विज्ञान में एमए थे। सरकारी शिक्षक थे। उन्होंने बताया कि भगवंत मान पांचवीं या छठी में थे। अमेरिका या विदेश में चुनाव होते तो वह भगवंत की ड्यूटी लगाते कि वह रेडियो पर सुनकर बताए कि कौन सी पार्टी जीती है। तभी से उनकी रुचि राजनीति में हो गई।