सीआईए स्टाफ खरड़ एवं खरड़ सिटी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत चोर गिरोह के सभी छह सदस्यों को तीन का पुलिस रिमांड खत्म होने पर अदालत ने रोपड़ जेल भेज दिया है।
पुलिस ने इनके कब्जे से लाखों रुपये मूल्य के गहने, नगदी और चोरी का सामान बरामद किया था।
पुलिस ने बताया कि यह लोग चोरी के कहने गोल्ड फाइनेंस कंपनी में गिरवी रख कर रुपये लेकर गायब हो जाते थे।
सन् 2011 में आरोपियों ने मुथुट गोल्ड फाइनेंस कंपनी में 21 तोले गिरवी रखकर चार लाख 18 हजार रुपये का लोन लिया था।
पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के प्रबंधकों को शनिवार को पूछताछ के लिए मय दस्तावेजों के थाने बुलाया है।
थाना सिटी प्रभारी विजय कुमार ने बताया कि 30 सितंबर को खरड़ सिटी थाना ने गांव खानपुर निवासी संदीप कुमार के विरुद्ध चोरी का मामला दर्ज किया था।
आरोपी साथियों के साथ मिलकर मोहाली, खरड़, डेराबस्सी एवं आसपास के क्षेत्रों में बंद घरों से चोरी करने में माहिर है।
पुलिस ने 6 अक्तूबर को बांसा वाली चुंगी खरड़ के निकट नाकाबंदी के दौरान संदीप कुमार (21) एवं रोशन कुमार (22) को चोरी के सामान सहित गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह चोरी का सामान एवं गहने फेज-7 मोहाली निवासी साथी हरजिंदर सिंह को बेचने के लिए देते थे।
हरजिंदर सिंह साथियों के साथ मिलकर सामान को बेचता था। बाद में सभी प्राप्त रकम को आपस में बांट लेते थे।
काबू किए दोनों आरोपियों की निशानदेही पर हरजिंदर सिंह (43) रणजीत कालोनी, खरड़ निवासी हरदीप सिंह (21) व उसके जुड़वा भाई हरप्रीत सिंह तथा गांव लखनौर निवासी जसवीर सिंह (23) को भी गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में उन्होंने 7 अक्तूबर को खरड़ सिटी थाना एवं 3 सितंबर को डेराबस्सी क्षेत्र चोरी करना स्वीकार किया।
आरोपी हरजिंदर सिंह ने पुलिस को बताया कि जब चोरी के गहने सुनार ने खरीदने से मनाकर दिया, तो उसने मुथुट फाइनेंस कंपनी फेज-7 मोहाली में 21 तोले गहने देकर 4 लाख 18 हजार रुपये ले लिए।
इसकी एवज में उसने केवल शपथ पत्र दिया था। पुलिस ने रिमांड के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर 2 एलसीडी, एक सिलेंडर, कुछ घड़ियां, एक मोटर साइकिल तथा 3 लाख 50 हजार रुपये की नगदी बरामद की है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 380, 454, 457 के तहत मामला दर्ज किया है।
किस तरह लगाया चूना
मुथुट फाइनेंस कंपनी के प्रबंधकों के अनुसार कंपनी सोने के बदले लोन देती है। 21 तोले सोने के गहने गिरवी रख कर इन लोगों ने 2011 में तीन लाख अट्ठारह हजार का लोन लिया था। इसकी एवज में इन लोगों ने शपथ पत्र दिया था। जब इन लोगों ने कंपनी की कोई किश्त नहीं चुकाई तो सोना जब्त कर लिया गया। पुुलिस को बताया गया कि आरोपियों ने कंपनी को कोई पहचान पत्र नहीं दिया और न ही वैरीफिकेशन कराया। नहीं कंपनी को सोने के गहने के मालिकाना हक के बिल दिए।