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Mohali News: डायबिटिक फुट के बेहतर इलाज पर मंथन, 100 से अधिक डॉक्टरों ने ली विशेष ट्रेनिंग

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मोहाली। डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच उससे जुड़ी जटिलताओं को रोकने के लिए सेक्टर-62 में डायबिटिक फुट पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। एक दिवसीय कार्यक्रम में उत्तर भारत से 100 से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों को ऐसी आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की जानकारी देना था, जिनकी मदद से गंभीर स्थिति में भी मरीजों के पैर काटने की नौबत टाली जा सके।
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कार्यक्रम में वैस्कुलर सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, एंडोक्रिनोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. रावुल जिंदल ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए एंजियोप्लास्टी, डीब्राइडमेंट, फुट बायोमैकेनिक्स और चारकोट न्यूरोआर्थ्रोपैथी जैसी जटिल समस्याओं के उपचार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ने कहा कि डायबिटिक फुट की समय पर पहचान सबसे जरूरी है। पैरों में ऐसा घाव जो जल्दी न भरे, सूजन, लालिमा या कॉर्न्स से खून निकलना गंभीर संकेत हो सकते हैं। बचाव के लिए शुगर लेवल नियंत्रित रखना, पैरों की रोजाना जांच करना, साफ-सफाई और सुरक्षात्मक जूते पहनना जरूरी है। जानकारों के अनुसार भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, और पैरों के कटने के अधिकांश मामलों के पीछे डायबिटिक फुट की जटिलताएं जिम्मेदार होती हैं।
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