मोहाली। भारत की महिला क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत में मोहाली की बेटी अमनजोत कौर ने भी अहम भूमिका निभाई। जीत के बाद फेज-5 स्थित उनके घर में जश्न का माहौल है। सुबह से ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर परिवार और पड़ोसी भंगड़ा डालते नजर आए। परिवार का कहना है कि अमनजोत को मिठाइयां पसंद नहीं इसलिए मां रणजीत कौर ने उनके लिए खासतौर पर राजमा-चावल बनाने की तैयारी की है। वे अपनी चैंपियन बेटी का स्वागत फूलों की मालाओं और ढोल-भंगड़े के साथ करेंगे।
मां रणजीत कौर के मुताबिक, अमनजोत घर, पढ़ाई और क्रिकेट तीनों में ऑलराउंडर है। वह एमए पास है और नागेश सर से कोचिंग ली थी। पिता, जो बलौंगी में कारपेंटर की दुकान चलाते हैं, कहते हैं कि मैच के दौरान सांसें थम सी गई थीं। जब इंडिया जीता तो लगा जैसे खुद जीत गए हों। क्रिकेट का टैलेंट इसे गॉड गिफ्ट मिला है।
अमनजोत बचपन से क्रिकेट की शौकीन रही हैं। मां बताती हैं कि वह 6 साल की उम्र में लड़कों के साथ ग्राउंड पर खेलती थी और अक्सर अकेली लड़की होती थी। परिवार ने कभी उसे रोका नहीं। यहां तक कि जब क्रिकेट खेलते हुए उसने कई घरों के शीशे तोड़ दिए तो दादी लोगों से भिड़ जाती थीं और कहती थीं कि मेरी पोती को कुछ मत कहना।
परिवार ने देर रात तक देखा मैच
बुआ हरविंदर कौर बताती हैं कि परिवार ने देर रात तक मैच देखा था। अमनजोत खुद को कभी सिर्फ लड़की नहीं मानती थी। हमेशा कहती थी कि मैं लड़का हूं, मुझे किसी से कम नहीं रहना। दादा ने गर्व से कहा कि पोती ने देश का नाम रोशन किया, अब पूरा मोहाली उस पर गर्व कर रहा है।