गलत तरीके से हिसाब लगाकर बिजली बिल भेजना और उस गलती को सुधारने चार साल लगा देने के मामले को जिला उपभोक्ता फोरम ने गंभीरता से लिया है। मामले में फोरम ने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ( पीएसपीसीएल) को सेवाओं में कोताही का दोषी करार देते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह भुगतान पावरकाम को एक महीने में करना होगा। इस संबंध में फोरम में केस गुड़गांव निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल रनबीर सिंह ने दायर किया था। कर्नल ने बताया कि उसका जीरकपुर में एक फ्लैट है। उसने पावरकाम से 2011 में उसमें एक मीटर लगाया था।
मीटर डोमेस्टिक सप्लाई कैटेगरी में लिया था। उसकी क्षमता 10.98 किलोवाट थी। कर्नल ने बताया कि दिसंबर 2011 से लेकर 19 अप्रैल 2012 तक उसे पावरकाम की तरफ से कोई बिल नहीं भेजा गया। जबकि फरवरी 2012 से अप्रैल 2012 का बिल उन्हें 19 अप्रैल 2012 को मिला। इसके अलावा बीस जून व अगस्त-2012 में भी उन्हें बिल मिले। लेकिन बिलों में खपत काफी अधिक दिखाई गई थी। क्योंकि मीटर में खराबी थी। अगस्त 2012 में पीएसपीसीएल ने उनका मीटर हटा दिया। जबकि एक अस्थाई मीटर लगा दिया गया। जबकि खराब मीटर की रोपड़ लैब में जांच की गई। इसमें वह खराब पाया गया। इसके बाद अक्तूबर में पावरकाम ने शिकायतकर्ता के यहां नया मीटर लगा दिया। इसके बाद फोरम में पावरकाम ने कहा कि वह सेवाओं में कोताही का दोषी नहीं है। उपभोक्ता को जो बिल जारी किए गए थे। वह उपभोक्ता द्वारा खर्च की गई बिजली के हिसाब से जारी किए गए थे। जबकि खराब मीटर वाला अमाउंट रिफंड कर दिया गया है। हालांकि, फोरम ने माना कि चार साल तक उन्हें गलत तरीके से बिल भेजे गए हैं। इससे उपभोक्ता को मानसिक परेशानी हुई है। ऐसे में इस चीज को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।