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मोगा सेक्स स्कैंडल: एसएसपी, एसपी और इंस्पेक्टर को पांच-पांच साल की सजा, एक इंस्पेक्टर को आठ साल की कैद

Mon, 07 Apr 2025 07:35 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली

सार

पंजाब के चर्चित 18 साल पुराने मोगा सेक्स स्कैंडल मामले में दोषी पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों को आज मोहाली सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सजा सुनाई गई।
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मोगा सैक्स स्केंडल में फैसला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने कुख्यात मोगा सेक्स स्कैंडल मामले में पंजाब के चार पूर्व पुलिस अधिकारियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। दोषियों में तत्कालीन एसएसपी दविंदर सिंह गरचा, पूर्व एसपी हेडक्वार्टर मोगा परमदीप सिंह संधू, मोगा सिटी थाने के पूर्व एसएचओ रमन कुमार और मोगा के सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह शामिल हैं। दोषियों पर अदालत ने दो-दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। 
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वहीं सीबीआई कोर्ट ने पूर्व एसएचओ रमन कुमार को फिरौती एक्ट की धाराओं के तहत तीन साल की अतिरिक्त सजा और एक लाख रुपये जुर्माना किया है। दोषियों के खिलाफ रणजीत सिंह ने अदालत में केस दायर किया था। वहीं मामले में अकाली नेता तोता सिंह के बेटे आरोपी बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन और सुखराज सिंह को बरी किया गया है।

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क्या था मामला
यह मामला 2007 में उस समय सामने आया था, जब राज्य में अकाली-भाजपा सरकार थी। मोगा के थाना सिटी ने जगरांव के एक गांव की लड़की की शिकायत पर गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पीड़िता के बयान दर्ज किए। इसमें उसने करीब 50 अज्ञात लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने इस केस की जांच में ब्लैकमेलिंग करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने केस में कई व्यापारियों और राजनेताओं के नाम जोड़ दिए। इसी दौरान मोगा के भागी के गांव के रंजीत सिंह ने एसएचओ अमरजीत सिंह द्वारा 50 हजार रुपये मांगने की ऑडियो रिकॉर्ड कर ली। उसको धमकी दी गई थी कि रुपये न देने पर उसे दुष्कर्म के मामले में उसे गिरफ्तार कर लेंगे। रंजीत ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) को इसकी शिकायत की। इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। जब इस मामले में राजनेताओं और व्यापारियों के नाम आने लगे, मीडिया में यह केस सुर्खियों बनने लगा तो 12 नवंबर 2007 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले का खुद ही संज्ञान लिया। साथ ही पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद सारे केस की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया था।
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सरकारी गवाह की कर दी थी हत्या
इस मामले में मनप्रीत कौर नाम की महिला को सरकारी गवाह बनाया गया था। हालांकि बाद में अदालत ने उसे विरोधी घोषित किया। इस वजह से उसके खिलाफ मोहाली अदालत में अलग से कार्रवाई शुरू हुई। इसके अलावा रणबीर सिंह उर्फ राणू और करमजीत सिंह सरकारी गवाह बने। हालांकि इस मामले में सरकारी गवाह बनी मनजीत कौर जीरा के पास नाम बदलकर रह रही थी। उस समय वह गर्भवती थी। सितंबर 2018 में उसकी और उसके पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस पूरे मामले में 2007 में एफआईआर दर्ज कराने वाली नाबालिग लड़की के विरुद्ध किशोर न्यायालय में एक अलग मामला लंबित है।
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