मोहाली। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आज के समय में वैश्वीकरण के दौर में आतंकवाद आसानी से अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक सरहदों को पार कर सकता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रयोग से नौजवानों को उकसाने, दहशत फैलाने और दहशतगर्दी विचारधारा का प्रसार करने में योगदान डाला जा रहा है। वह इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) में केपीएस गिल मेमोरियल लेक्चर को संबोधित कर रहे थे।
पड़ोसी दुश्मन और सरहद से लगता होने के नाते पंजाब संवेदनशील राज्य है। वहीं जम्मू-कश्मीर के साथ जुड़े होने और नशा व आतंकवाद की बढ़ रही चुनौती की बात करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आधुनिक पुलिसिंग की जरूरत पर जोर दिया। समागम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री ने कहा हम किसी भी सूरत में पंजाब को बीते हुए काले दौर की तरफ फिर ले जाने की इजाजत नहीं दे सकते। उन्होंने केपीएस गिल द्वारा पंजाब पुलिस को दिए नेतृत्व और राज्य के हालात सुखदायक और आम की तरह बनाने में उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए पुलिस फोर्स को स्व. पूर्व डीजीपी की लीडरशिप से सेध लेने को कहा।
स्वागती भाषण में डीजीपी दिनकर गुप्ता ने ताजा सुरक्षा हालात और इंटरनेट और ऑनलाइन सोशल मीडिया मंचों के प्रयोग बारे संक्षिप्त में जानकारी दी। उन्होंने भरोसा दिया कि पंजाब पुलिस कट्टरवाद और आतंकवाद की दोहरी चुनौतियों के मुकाबले के लिए अपना सामर्थ्य लगातार बढ़ा रही है।
इंटरनेट आंतकियों के स्वभाव को बदलने में भी सहायक
भाषण के बाद एक सवाल के जवाब में अमरीकी माहिर ने कहा कि गूगल, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया ग्रुपों को अब यह एहसास हो रहा है कि तबाह करने वाली सरगर्मियों के लिए इन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के प्रयोग से उनकी भरोसेयोग्यता को चोट लग रही है। इंटरनेट, पाकिस्तान में आतंकवादियों के स्वभाव और चरित्र को बुनियादी रूप में बदलने में सहायक सिद्ध हुआ था। वहीं तालिबान जो 2001 में ताकत गंवाने के बाद में सिलसिलेवार ढंग से आगे बढ़ रहा है, ने इंटरनेट के द्वारा सूचना तकनीक का प्रयोग बढ़ाया है और वह इस तकनीक को अपनी इलेक्ट्रॉनिक प्रापेगंडा जंग शुरू करने के लिए बेहद अनुकूल मान रहा है।
तालिबान के पास भी है इंटरनेट डोमेन
डॉ. चाक ने खुलासा किया कि तालिबान के पास इस समय कई इंटरनेट डोमेन हैं। डॉ. चाक के मुताबिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवादियों और दहशतगर्दों द्वारा इंटरनेट और ऑनलाइन मंचों के प्रयोग के सुरक्षा हालात पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह भारत के लिए अत्यधिक चिंता का विषय है। कश्मीर में दंगों और प्रदर्शनों को प्रोत्साहन देने के लिए ट्विटर का पहले ही प्रयोग किया जा रहा है और अब जब कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटा दिया गया है तो लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन ऑनलाइन मंचों के द्वारा बेचैनी का आलम तेज करने के लिए तत्पर होंगे।
अब आतंकी इस तकनीक का कर रहे प्रयोग
डॉ. चाक ने कहा कि आईएस ने भी अमेरिका और पश्चिम में एकल व्यक्ति द्वारा हिंसक हमला करवाने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म को इस्तेमाल किया है। नेताहीन विरोध के उभार में सूचना तकनीक बहुत अहम रही है। अफगानिस्तान के क्षेत्रों में सक्रिय आईएस अमेरिका पर हमला करने के सम्बन्ध में कुछ समय से यह तकनीक इस्तेमाल कर रही है। इस बात का कोई कारण नहीं कि दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरू, चेन्नई और लुधियाना जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाने वाली ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की जा सकती।