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मोहाली नगर निगम की हाउस मीटिंग, कई मुद्दों पर होगा हंगामा

Tue, 02 Aug 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
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मोहाली म्युनिसिपल कारपोरेशन की मीटिंग - फोटो : amar ujala
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मोहाली नगर निगम की मंगलवार को होने वाली हाउस मीटिंग हंगामेदार रहने के आसार है। सत्ताधारी दल को विपक्ष कई मुद्दों पर घेरने को तैयार है। इसके लिए दोनों दलों ने प्लानिंग पहले से कर रखी है। वहीं, इस बार होने वाली मीटिंग कई कारणों से खास है। क्योंकि मेयर के अकाली दल में जाने के कयास हैं तो दूसरी तरफ डिप्टी मेयर व कमिश्नर के बीच हुए विवाद के बाद यह पहली मीटिंग है। इसमें कमिश्नर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी है। हालांकि, अकाली-बीजेपी ने पहले साफ कर दिया है कि वह निगम कमिश्नर के साथ है। निंदा प्रस्ताव पर वह सत्ताधारी दल का साथ नहीं देंगे। क्योंकि उनका आरोप है कि काम तो सत्ताधारी दल वाले ही नहीं करने दे रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, मीटिंग में इस बार जलभराव संबंधी पेक की रिपोर्ट पेश की जानी है। विपक्षी दल का आरोप है कि रिपोर्ट चार महीने से मेयर के पास पड़ी है। उस पर अभी तक चर्चा नहीं हुई है। इस दौरान मेयर विदेश दौरा भी कर आए, जबकि उस रिपोर्ट पर नजर नहीं डाली गई। वहीं, अब पूरा शहर पानी में डूब रहा है। जगह-जगह सड़क धंस रहीं हैं। इसके लिए सीधे मेयर व सत्ताधारी दल जिम्मेदार है। अब लोग सीधे पार्षद से सवाल-जवाब करते हैं। फेज-5 के बीजेपी पार्षद अरुण शर्मा व अशोक झा ने कहा कि उनके इलाके में बारिश होने पर जलभराव व सीवरेज की समस्या बहुत गंभीर है। इस बार भी बारिश में कई घरों में जलभराव हो गया था। वहीं, लगातार सीवरेज लाइन धंस रही है। लेकिन, सत्ताधारी दल इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उनके वार्डों में मात्र साढे़ छह लाख रुपये का काम हुआ है। इससे पता चलता है कि सत्ताधारी दल विकास को लेकर कितना गंभीर है। वहीं, उन्होंने कहा कि अगर मीटिंग में निगम कमिश्नर के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाया जाता है तो वह किसी भी कीमत पर सत्ताधारी दल का साथ नहीं देंगे।
जिक्रयोग है कि 15 जुलाई को भी हाउस की मीटिंग हुई थी। इसमें डिप्टी मेयर व कमिश्नर में रेहड़ी फड़ी के मुद्दे पर हंगामा हो गया था। इस कारण किसी भी मुद्दे पर बहस नहीं हो पाई थी। वहीं, कमिश्नर ने मीटिंग के बाद साफ कर दिया था कि आगे मेयर की अगुवाई में होने वाली मीटिंगों में हिस्सा नहीं लेंगे। उनका स्टाफ ही मीटिंग में जाएगा। उनका कहना था कि वह काम करके भी बेवजह जलील नहीं होना चाहते हैं।
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टेंडर के चक्कर में रुका है शहर का विकास
चार महीने पहले 14.90 लाख रुपये से प्रत्येक वार्ड में विकास कार्य करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए प्लान तैयार किया गया था। इस दौरान करवाए जाने वाले कामों के टेंडर भी हो गए थे। सिंगल फर्मों के टेंडर आए। वे भी तीन फीसदी लेस रेट पर, जबकि इस तरह का टेंडर तीन महीने पहले 35 से 42 फीसदी लेस रेट पर ठेकेदारों ने भरा था, साथ ही काम भी पूरा किया। लेकिन अब तीन फीसदी लेस पर प्रत्येक काम के लिए एक-एक टेंडर आया है। इससे निगम अधिकारियों को संदेह हुआ कि इसमें फर्मों ने पूलिंग की है। इस कारण कमिश्नर ने दोबारा टेंडर लगाने के लिए सरकार को लिखा था। जबकि वित्त एंड अनुबंध कमेटी की मीटिंग में इस पर बहुसम्मति बनी थी। लेकिन सत्ताधारी दल के मेंबरों के दबाव में इससे सर्वसम्मति पास कर दिया गया। यदि यह टेंडर अलाट हो जाते तो निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो जाता।
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