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जनवरी के बाद से नही, भेजी दवाई, बाहर से ले रहे मरीज

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जीरकपुर। पंजाब सरकार के लिए सेहत सुविधा एक बहुत बड़ी चुनौती है। भले ही पहले पिछली सरकारें हों या फिर मौजूद आप की सरकार, जिन्होंने चुनाव के समय सेहत सुविधा को प्रथम श्रेणी में रखा था, लेकिन अपने वादे के मुताबिक सरकार सेहत सुविधा देने मेें असफल साबित हो रही है। भले पंजाब सरकार ने 75 मोहल्ला क्लीनिक खोले हैं। उनमें भी सुविधाओं की कमी है। लोगों का कहना है कि अगर सरकार मोहल्ला क्लीनिक खोलने के बजाय डिस्पेंसरियों की हालात सुधार देती तो शायद लोगों को ज्यादा फायदा होता।
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जीरकपुर के अधीन आते मोहल्ला क्लीनिक और डिस्पेंसरियां बदहाल में हैं। मोहल्ला क्लीनिक 15 अगस्त को शुरू हुआ था और शुगर टेस्ट के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल कर समय निकाला जा रहा था। जबकि शुगर किट 10 सितंबर के बाद क्लीनिक में पहुंची तो जाकर टेस्ट शुरू हुए। हैरानी की बात तो यह है की शहर की डिस्पेंसरियो में जनवरी के बाद से अब तक दवाई ही नहीं आई, इस कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। डिस्पेंसरियों में डॉक्टर तो हैं पर मरीजों को देने के लिए दवाई नहीं है। डिस्पेंसरियों में मौजूद डॉक्टरों का कहना है कि हम सिपाही है और बॉर्डर पर खड़े है, पिस्तौल भी है, लेकिन गोलियां नहीं हैं। अगर हमारे पास दवाई नहीं होगी तो हम मरीजों को क्या देंगे। इन हालातों में हमारे पास दवाई लिखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
डिस्पेंसरी में नहीं मिल रही दवा, मरीज खरीद रहे बाहर से
शहर के सेहत केंद्र नगला और सिंघपुरा के अलावा गांव लोहगढ़, पभात, छत और दयालपुरा की डिस्पेंसरियों में जनवरी से दवाई न पहुंचने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि सभी डिस्पेंसरियों में डॉक्टर के साथ स्टॉफ भी मौजूद है। लेकिन दवाई न होने के कारण डॉक्टर भी नकारा हो गए हैं। सरकार द्वारा डिस्पेंसरियों में 15 दिसंबर 2011 और उसके बाद 4 जनवरी 2022 में दवाईयों की सप्लाई भेजी थी। इसके बाद अब तक कोई दवाई नहीं आई। नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा कि मैं खुद अपने खर्च पर सीपीएम दवाई लेकर आता हूं और को दी जा रही है। डॉक्टर ने बताया की हम पर्ची पर दवाई लिख देते हैं और मरीज बाहर से दवाई ले लेते हैं, हमारे पास ओर कोई रास्ता नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
सरकार का पूरा जोर मोहल्ला क्लीनिक पर लगा हुआ है। अब आरएमओ के पास तो दवाई डीसी द्वारा भेजी जाती है और सीएचओ के पास हमारी तरफ से जाती है। जहां-जहां आरएमओ और सीएचओ इकट्टे हैं वहां वह आपस में दवाई के लिए अक्सर विवाद रहता है। आरएमओ के पास तो इस समय बिलकुल दवाई खत्म है। सीएचओ के पास तो फिर भी दवाई है। डीसी मोहाली से कब तक दवाई आएगी हम कुछ नहीं बता सकते। हमारे पास तो कल एक ट्रक दवाईयों का आया है। जो एक हफ्ते के अंदर सभी सेंटरों पर भेज दी जाएगी। बाकी सरकार के ऊपर डिपेंड करता है वो कितना स्टॉक भेजती है। हम इसे थोड़ी थोड़ी सब सेंटरों में भेज देंगे। -डॉ. धरमिंदर सिंह, एसएमओ डेराबस्सी।
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