सेहत विभाग पंजाब द्वारा सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं,लेकिन स्टाफ का टोटा अस्पतालों में साफ दिख रहा है। ज्यादातर अस्पतालों में डाक्टरों का काम निपटाते चपरासी और पैरामेडिकल स्टाफ की जगह ट्रेनिंग के लिए आने वाले स्टूडेंटों से काम लिया जा रहा है। फेज- छह का सरकारी अस्पताल इन्हीं बदतर हालातों से जूझ रहा है। इस अस्पताल में एमरजेंसी के साथ एक काउंटर बनाया गया है। जहां स्टूडेंट दवाएं देने के काम करते हैं। इनमें कई स्टूडेंट ऐसे हैं जो डाक्टरों की लिखी दवाएं पढने में सक्षम नहीं है। हालात यह है कि कई बार यहां गलती ऐसी भी होती है कि दूसरी दवाएं मरीजों को थमा दी जाती हैं। हद दो दिन पहले तब हुई जब एक डाक्टर द्वारा बाल रोगी के लिए लिखे गए सिरप की जगह गोलियां दे दी गई। बताया गया है कि ये मामला संबंधित डाक्टर के सामने आने पर स्टूडेंट को अच्छी खासी फटकार भी पड़ चुकी है। हालांकि मरीजों का कहना है कि इस समस्या का हल सिर्फ फटकार लगाने से नहीं होगा। इसके लिए सेहत विभाग को अनुभवी स्टाफ को नियुक्त करने की जरुरत है। समाजसेवी अतुल शर्मा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है,क्योंकि ऐसी लापरवाही और गलती से संबंधित मरीज तक दूसरी दवा पहुंचना उसके लिए घातक हो सकता है। उन्होंने सेहत विभाग से मांग की है कि यदि जिन भी कारणों से स्टूडेंट से काम लेना है,तो भले लिया जाए,लेकिन इनके साथ एक अनुभवी स्टाफ की ड्यूटी जरुर होनी चाहिए। उधर सिविल सर्जन डा.रंजीत गुरु को जब इस मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर ऐेसी लापरवाही हो रही है तो कार्रवाई आवश्य होगी।