मोहाली। पंजाब नेशनल बैंक में फर्जी पहचान के आधार पर 66 लाख रुपये निकालने के मामले में अदालत ने आरोपी संदीप सिंह को दोषी करार दिया है। उसे तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला 17 सितंबर 2026 को सुनाया गया। संदीप सिंह ने नरेंद्र सिंह बनकर बैंक में खाता खुलवाया था।
जेएमआईसी अदालत ने संदीप सिंह को भारतीय दंड संहिता की नौ धाराओं के तहत दोषी पाया। इन धाराओं में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं। प्रत्येक धारा में 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यह मामला पंजाब नेशनल बैंक की सेक्टर-71 शाखा से जुड़ा है। तत्कालीन बैंक मैनेजर सुरिंदर कुमार शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। बैंक में नरेंद्र सिंह के नाम से एक बचत खाता खोला गया था। खाता खोलने के लिए फर्जी पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत किए गए थे। 26 अक्तूबर 2016 को इस खाते में 78 लाख रुपये का एक चेक जमा किया गया। यह चेक गोरखपुर स्थित पीएनबी शाखा से जारी होना बताया गया था।
फर्जीवाड़े का खुलासा
बैंक ने चेक को सही मानकर रकम खाते में जमा कर दी। इसके बाद खाते से 66 लाख रुपये नकद निकाल लिए गए। कुछ समय बाद गोरखपुर शाखा के एजीएम ने मोहाली शाखा को सूचित किया। उन्होंने बताया कि चेक में फर्जीवाड़ा हुआ है। चेक के वास्तविक खाताधारक अशोक कुमार ने इसे जारी करने से इन्कार किया और बताया कि मूल चेक उनके पास ही है। बैंक ने खाते में दर्ज पते की जांच की, लेकिन वहां नरेंद्र सिंह नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।
अदालत का फैसला और सबूत
अदालत ने 30 गवाहों की गवाही और रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि संदीप सिंह ने नरेंद्र सिंह की पहचान अपनाई थी। उसने फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक खाता खुलवाया था। खाता खोलने के फॉर्म पर लगी फोटो संदीप सिंह की थी। यही फोटो कथित पहचान दस्तावेज पर भी थी। प्रस्तुत ड्राइविंग लाइसेंस का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
अदालत ने फैसले में बैंक के तत्कालीन मैनेजर की भूमिका पर सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, उसी अधिकारी ने पहचान दस्तावेज और चेक दोनों की जांच की थी। इसके बावजूद फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और चेक पकड़ में नहीं आए। अदालत ने जांच एजेंसी को इस पहलू की गहन जांच करने की जरूरत बताई। मामले में अन्य आरोपी अभी फरार हैं। सार्वजनिक धन से जुड़े इस मामले में जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है। आरोपी को आईपीसी की धारा 406 के आरोप से राहत मिली।