जीरकपुर। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता निखिल शर्मा ने जीरकपुर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस शहर में जलभराव, ओवरफ्लो सीवर, यातायात अव्यवस्था और जनस्वास्थ्य संकट को लेकर है। नोटिस में आरोप है कि नगर परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रही है। मामूली बारिश के बाद भी शहर का अधिकांश हिस्सा पानी में डूब जाता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। जलभराव के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कें घंटों जाम रहती हैं। इससे एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। पानी में छिपे गड्ढों और खुले सीवर से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। बारिश के पानी में सीवर और कचरे के मिलने से डेंगू, मलेरिया, हैजा और दस्त जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता ने नगर परिषद से नोटिस मिलने के 48 घंटे के भीतर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। इसमें जलभराव वाले क्षेत्रों में उच्च क्षमता के पंप लगाना, सीवर और नालों की तत्काल सफाई, राष्ट्रीय राजमार्ग व प्रमुख मार्गों पर जलनिकासी सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, यातायात पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर जाम की समस्या दूर करने तथा मच्छररोधी छिड़काव, फॉगिंग और प्रभावित क्षेत्रों के कीटाणुशोधन जैसे कदम उठाने की भी मांग की गई है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका, राष्ट्रीय हरित अधिकरण तथा राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।