विधानसभा का घेराव करने जा रहे खेत मजदूरों पर लाठीचार्ज
मजदूरों का आरोप- छह बार बैठक का समय देकर इन्कार कर रही है सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पंजाब भर से आए ग्रामीण एवं खेत मजदूर जत्थेबंदियों के साझा मोर्चा ने शुक्रवार को शहर में अपनी मांगों को लेकर धरना दिया। धरने के बाद विधानसभा की ओर से मार्च कर रहे मजदूरों को मोहाली पुलिस ने फेज 8 और 9 की सड़क पर रोक दिया। इस दौरान मजूदरों ने बैरिकेड तोड़ कर आगे जाने की कोशिश की। पुलिस के साथ धक्का मुक्की भी करनी पड़ी। इस दौरान पुलिस को लाठी का प्रयोग करना पड़ा। जिसमें काफी संख्या में मजदूरों और महिलाओं को चोट भी लगी। 29 मार्च को सरकार से मीटिंग के लिए मिले आश्वासन के बाद धरना दे रहे मजदूरों को शांत करवाया गया।
इससे पहले सुबह से ही पंजाब की आठ ग्रामीण एवं खेत मजदूर जत्थेबंदियों की साझा मजदूर मोर्चा की अगुवाई में गुरद्वारा श्री अंब साहिब के सामने धरना दिया गया। इस मौके पर मोर्चा में शामिल जमीन प्राप्ती संघर्ष कमेटी के प्रधान मुकेश मलोद, पंजाब खेत मजदूर सभा की देवी कुमारी, देहाती सभा के गुरनाम दाउद, क्रांतिकारी पेंडू यूनियन के लखबीर लोंगोवाल, मजदूर मुक्ति मोर्चा के भगवंत सिंह, पंजाब खेत मजदूर के प्रदेश प्रधान जोरा सिंह नसराली और पेंडू मजदूर यूनियन के कश्मीर सिंह ने कहा कि सीएम भगवंत मान वाली सरकार जब से सत्ता में आई है तब से लेकर अब तक एक साल की प्राप्ती जीरो है। उन्होंने कहा कि आप सरकार की एक साल की कारगुजारी में खेत मजदूरों के लिए कोई काम नहीं किया गया और खेत मजदूरों को एक साल में छह बार मीटिंग का समय दिया। लेकिन बार-बार हां करने के बाद इन्कार करते रहे। इस बार बजट में अलग-अलग श्रेणियों के लिए पैसे रखे गए, परंतु खेत मजदूरों का जिक्र तक नहीं किया। पिछले बजट में एक शब्द लिखा था कि खेत मजदूरों की भलाई के लिए काम किया जाएगा परंतु इस बजट में यह शब्द भी सही नहीं समझा गया। इस कारण उनमें रोष पाया जा रहा है।
मजदूरों की दिहाड़ी 700 रुपये करके साल भर के रोजगार, मजदूरों की कर्जा माफी, जमीनों की बांट, पंचायती जमीनों का तीसरा हिस्सा जमीन मजदूरों के लिए सस्ती दर पर ठेके पर देने, बेघर और जरूरतमंदों को दस-दस मरले के प्लाॅट देने, पेंशन में बढ़ोतरी करने समेत कई मांगे है जिस संबंधी सीएम द्वारा मीटिंग रख कर हर बार रद्द कर दी जाती है। उन्होंने साफ किया है कि उनका प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जबतक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाती।