मोहाली। जिला अदालत में जमीन के मुआवजे का 13.19 लाख रुपये का चेक फर्जी खाता खुलवाकर कैश करवाने के मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने अपराध को साजिश बताते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी गुरदीप सिंह के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसको इस मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता की मिलीभगत से झूठा फंसाया है, क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ता को संबंधित पुलिस अधिकारियों ने कभी भी कोई नोटिस जारी नहीं किया। अदालत को बताया कि जांच एजेंसी ने केस दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता के आरोपों की सत्यता की जांच नहीं की। याचिकाकर्ता को जांच एजेंसी ने आरोपों का खंडन करने का कोई अवसर नहीं दिया। याचिकाकर्ता को झूठा फंसाने के लिए जांच अधिकारी ने पूरी कार्यवाही पक्षपातपूर्ण तरीके से की थी। अदालत में यह भी दलील रखी कि याचिकाकर्ता को पुलिस ने 6 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था तब से वह न्यायिक हिरासत में है। उससे कुछ बरामद भी नहीं किया जाना है, इसलिए उसकी नियमित जमानत याचिका मंजूर की जाए।
वहीं, दूसरी ओर सरकारी वकील ने अदालत में इसका विरोध करते हुए दलील दी कि गुरदीप सिंह ने इस केस के सह आरोपी करनैल सिंह के साथ मिलकर 13 लाख 19 हजार 877 रुपये की रकम निकलवाई थी। गुरदीप सिंह जो पूरी आपराधिक साजिश के साथ-साथ धोखाधड़ी की सभी कथित कार्रवाई का मास्टर माइंड है। उसने अपने दूसरे सह आरोपियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। इसलिए इसकी जमानत याचिका को खारिज किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी के कथित अपराधों की गंभीरता को देखते हुए नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
2022 में सोहाना थाने में दर्ज हुआ था केस
यह मामला वर्ष 2022 में सोहाना थाने में दर्ज हुआ था। इस मामले में शिकायतकर्ता नायब सिंह के बयान पर गांव इको लाह खन्ना निवासी करनैल सिंह, गांव औक्सी जट्टां पटियाला के रहने वाले गुरदीप सिंह और गांव सियाऊ के रहने वाले सुरमुख सिंह पर धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। मामला यह था कि शिकायतकर्ता नायब सिंह को उसकी एक्वायर की जमीन की मुआवजा राशि 13 लाख 19 हजार 877 रुपये चेक के माध्यम से अदा की गई थी। लेकिन नायब सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टेटमेंट दी थी कि उसने यह चेक ना तो दफ्तर से प्राप्त किया था और न ही चेक इनकैश करवाया था। जबकि दफ्तर की लेखा शाखा रिपोर्ट अनुसार मालिक नायब सिंह यह चेक क्लीयर करवा चुका है। इसके बाद जांच के लिए चार सदस्यी कमेटी का गठन किया गया। जांच में सामने आया कि जिस बैंक से चेक पास हुआ उस बैंक में अकाउंट ओपनिंग फार्म में जिस नायब सिंह की फोटो लगाई गई थी वह असल नायब सिंह की फोटो से नहीं मिलती थी और उस पर नायब सिंह के हस्ताक्षर भी जाली थे। जांच में पता चला कि जरनैल सिंह ने नकली नायब सिंह बनकर गमाडा से चेक प्राप्त किया था और गुरदीप सिंह ने उसकी गवाही भरी थी। चेक की राशि तीसरे आरोपी सुरमुख सिंह ने एटीएम के माध्यम से निकाली थी। बाद में तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।