सरकार के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जा सकते हैं मेयर
सरकार ने मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू की पार्षद की सदस्यता खारिज करने का फैसला सुनाया है, उसके खिलाफ मेयर उच्च न्यायालय जा सकते हैं। सरकार के फैसले के खिलाफ मेयर के करीबियों ने कहा कि सरकार ने जो फैसला किया है, वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा और सरकार के इन आदेशों पर स्टे आर्डर लेने का प्रयास किया जाएगा।
कैसी रहेगी अब शहर की राजनीति
अगर मेयर जीती सिद्धू उच्च न्यायालय जाते हैं और उन्हें स्टे मिल जाता है तो वह अदालत का फैसला आने तक पद पर बने रहेंगे। वहीं अगर उन्हें उच्च न्यायालय से स्टे नहीं मिलता है तो उनके वार्ड में छह महीने के अंदर चुनाव होने तय हैं। वहीं स्थानीय निकाय विभाग के निर्देशों पर नगर निगम में एक बैठक रखी जाएगी। इसमें नया मेयर बनाने के लिए एजेंडा लाकर नया मेयर बनाने के लिए भी नगर निगम हाउस के 50 पार्षदों की वोटिंग करवाई जाएगी।
ये है मामला
निकाय विभाग ने मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू को 15 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था कि उन्होंने उस सोसायटी को काम दिया है जिसके वह खुद सदस्य हैं। ऐसा करना नियमों का उल्लंघन है। इस पर उनसे 15 दिन में जवाब मांगा गया था। इसके बाद मेयर ने सरकार के पास अपना जवाब पेश करने के बजाय 15 दिन का समय खत्म होने से दो दिन पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नोटिस को खारिज करने की अपील की थी लेकिन अब हाईकोर्ट ने भी उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया है।