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Mohali News: किराया बढ़ाने के विरोध में रेहड़ी-फड़ी वालों ने काम बंद कर जताई नाराजगी

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डेराबस्सी। परिषद कार्यालय के पास दशहरा मैदान में रेहड़ी फड़ी वालाें ने िकराया बढ़ाए जाने के विरोध में काम बंद रखा। सभी ने एकजुटता दिखाई आैर रेहड़ियां नहीं लगाई। उन्होंने कहा कि एक तो महंगाई बढ़ रही है दूसरा किराया बढ़ाकर गरीबों को परेशान किया जा
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रहा है। बता दें कि पिछले कई वर्षों से दशहरा मैदान में रेहडि़यां लगाई जातीं हैं। इस जगह को बोली के जरिए ठेके पर लेकर मोटी ठेकेदार कमाई कर रहे हैं। रेहड़ी वालों का किराया दोगुना कर दिया गया। इसी के चलते शनिवार को नाराज रेहड़ी वालों ने काम बंद कर गुस्सा जाहिर किया। उन्हाेंने कहा कि गरीबाें को परेशान करना सही नहीं है। शहरवासियों का कहना है कि एक तरफ तो सनातन धर्म सभा डेराबस्सी जन कल्याण और गरीब लोगों की मदद के लिए जानी जाती है, लेकिन दूसरी तरफ शहर के कुछ लोगों ने मोटी कमाई करने के लिए सनातन धर्म सभा की जगह को बोली लगाकर एक साल के लिए किराए पर लेकर गरीबों रेहड़ी वालों से मोटा पैसा कमाया जा रहा है। गौरतलब है कि डेराबस्सी बस स्टैंड स्थित दशहरा ग्राउंड के नाम से मशहूर जगह सनातन धर्म सभा डेराबस्सी की जमीन है। लंबे समय से शहर में रहने वाले प्रवासी और शहर के गरीब लोग परिवार का भरण-पोषण करने के लिए हर दिन भोजन और फास्ट फूड के स्टॉल लगाते हैं।

9500 रुपये तक पहुंचा किराया
बता दें कि पहले ये रेहड़ियां रामलीला मैदान और उसके आसपास की सड़कों पर लगती थीं। ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें उक्त दशहरा मैदान में स्थानांतरित कर दिया, जो सनातन धर्म सभा डेराबस्सी की भूमि थी। पहले तो उन्हें इस जगह पर रेहड़ी लगाने की छूट दी गई। अब उक्त जगह पर रेहड़ी की संख्या बढ़ने लगी तो प्रशासन ने एक रेहड़ी से 1100 रुपये मासिक किराया वसूला। उसके बाद एक ठेकेदार ने यह जगह सनातन धर्म सभा डेराबस्सी से लीज पर ले ली और रेहड़ियों का किराया 3300 रुपये प्रति रेहड़ी प्रतिमाह कर दिया। इसके बाद छोटी रेहड़ी का किराया 5500 रुपये और बड़ी रेहड़ी का किराया 6500 रुपये प्रति माह कर दिया गया। दोबारा बोली लगने पर छोटी रेहड़ी का किराया 8500 रुपये और बड़ी रेहड़ी का किराया 9500 रुपये प्रति माह हो गया है। इसके फलस्वरूप शनिवार दशहरा मैदान सनातन धर्म सभा स्थल पर कोई रेहड़ी नहीं लगी। रेहड़ी मालिकों ने कहा कि वे किराए के मकान में रह रहे हैं। रेहड़ियों के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं। यदि ठेकेदार उनसे ऐसे रुपये ले लेगा तो वे क्या कमाएंगे? अगर उनका किराया कम नहीं किया गया तो वे यहां से अपनी रेहड़ी हटा लेंगे।
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