जीरकपुर। ढकोली के सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्र) में पिछले कई दिनों से पीने वाले पानी की पाइप लाइन लीक हो रही है। इस कारण रोजाना सैकड़ों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। अगर हम ऐसी लापरवाही करेंगे तो पानी की बर्बादी कैसे रोक पाएंगे। वहीं, इसकी जिम्मेदारी भी कोई अधिकारी नहीं लेना चाहता है। इसके अलावा सीएचसी अस्पताल में बड़ी हलोजेन लाइट दिन में भी जल रही है। इस कारण बिजली की बर्बादी भी हो रही है। अस्पताल प्रबंधन और नगर परिषद की लापरवाही के कारण पानी और बिजली जैसे दो बड़े स्रोतों की बर्बादी हो रही है। अस्पताल में आए कुछ लोगों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि यह पानी आज से नहीं बल्कि पिछले 15-20 दिन से लगातार बह रहा है। इसकी जानकारी अस्पताल के प्रबंधन को है, लेकिन कोई भी अधिकारी इस लीकेज को ठीक करवाने के लिए आगे नहीं आ रहा है।
लोगों ने बताया कि पाइप लाइन सीधी ट्यूबवेल से अस्पताल की टंकियों के साथ जोड़ी हुई है। एक ओर तो सरकार बड़े-बड़े विज्ञापन देकर पानी को बचाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी संस्थानों की ओर से इसे बर्बाद किया जा रहा है। लोगों ने बताया कि जैसे लगातार भूजल स्तर गिरता जा रहा है, इससे आने वाले समय में पीने वाले पानी की किल्लत हम सबको झेलनी पड़ेगी। इस तरफ हम सबको ध्यान देना चाहिए।
दिन में भी जल रही 1500 किलोवाट की हेलोजन लाइट
इसके बाद जब अमर उजाला की टीम ने अंदर अस्पताल का दौरा किया तो एक बड़ी करीब 1500 किलोवाट की हेलोजन लाइट दिन में भी जल रही थी। लोगों ने बताया कि यह ऐसे ही 24 घंटे जलती रहती है। लोगों ने बताया कि जिस भी कर्मचारी की यह जिम्मेदारी है उसे इसका ध्यान रखना चाहिए। इससे सरकारी बिजली बर्बाद की जा रही है। लोगों ने कहा कि अगर बिल खुद कर्मचारियों या अधिकारियों को अपनी जेब से भरना पड़ता तो शायद इतनी लापरवाही न की जाती। लोगों ने कहा कि इन दोनों स्रोतों की बर्बादी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
कोट्स
वैसे तो मैं एक महीने की छुट्टी पर हूं। लेकिन चेक करवा लेती हूं। पानी की लीकेज के लिए तो हमने कई बार नगर परिषद को शिकायत दी है, लेकिन वह हमारी बात सुनते ही नहीं। फिर भी मैं दोबारा शिकायत करवा देती हूं। लाइट्स बंद करने वाले कर्मचारी से भी लाइट बंद न करने के बारे पता कर लेती हूं। -पॉमी चतरथ, एसएमओ ढकोली।
कोट्स
इस समस्या का समाधान करवाने वाले जेई अभी छुट्टी पर हैं। कल टीम को अस्पताल में माैके पर भेजकर चेक करवा लेता हूं। जो भी मरम्मत होगी वह करवा दी जाएगी। -सुखविंदर सिंह, एसडीओ नगर परिषद जीरकपुर