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10 दिन में नहीं सुधरे हालात तो 9 हजार इकाइयों पर लगेगा ताला, साढे़ तीन लाख से ज्यादा हो जाएंगे बेरोजगार

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मोहाली। आसमान छूती कीमतों के बावजूद कच्चा माल न मिलने से औद्योगिक इकाइयां संकट में हैं। ऐसे में मोहाली के उद्योगपतियों ने एलान किया है कि 10 दिन में हालत नहीं सुधरे तो वो अपनी इकाइयों पर ताला लगा देंगे। अगर ऐसा हुआ तो जिले में एमएसएमई सेक्टर से जुड़ी 9000 औद्योगिक इकाइयां बंद हो जाएंगी। जिससे साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग एक झटके में सीधे तौर पर बेरोजगार हो जाएंगें। उद्योगपतियों ने इस हालात के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
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वीरवार को यहां मोहाली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर हालात न सुधरने पर अपनी इकाइयों को बंद करने का एलान कर दिया है। प्रेस कांफ्रेंस में एमआईए के प्रधान योगेश सागर सहित एसोसिएशन के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। इन्होंने पंजाब में औद्योगिक संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मोदी सरकार बड़े औद्योगिक और कारपोरेट घरानों की मदद कर रही है, जबकि एमएसएमई सेक्टर बर्बादी की कगार पर है। मोहाली में मुख्य तौर पर ट्रैक्टर्स पार्ट, ऑटोमोबाइल पार्टस, मशीनरी व कार्डबोर्ड जैसी एमएसएमई इकाईयां यानि माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम इंडस्ट्री है। मोहाली की औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल के तौर पर 85 फीसदी स्टील की जरूरत होती है। इन उद्योगपतियों का कहना है कि जिस तरह के स्टील की कच्चे माल के तौर पर उन्हें जरूरत होती है, उस पर मौजूदा समय में टाटा ग्रुप का एकाधिकार है। सरकार की नीतियों व एक ग्रुप के एकाधिकार के कारण पिछले 6 माह के दौरान स्टील की कीमतों में 55 प्रतिशत तक का उछाल आया है। पिछले तीन माह के दौरान यह बढ़ोत्तरी बहुत तेेजी से हुई है। जिससे मोहाली की एसएसएमई इकाइयां अपने ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रही हैं। एमआईए के महासचिव राजीव गुप्ता का कहना था कि कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले स्टील में प्रतिदिन आ रहे उछाल के कारण उनकी उत्पादन कीमत बढ़ रही है। जिस दाम पर ऑर्डर लिए गए हैं उत्पादन कीमत प्रतिदिन उससे उपर जा रही है। उस पर ट्रांस्पोर्टेशन की समस्या से समय पर माल न तो मिल रहा है और न ही भेजा जा पा रहा है। इससे उद्योगपति लगातार घाटे में जा रहे हैं। पहले ही कोरोना के कारण कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहा एमएसएमई सेक्टर अब डूबने की कगार पर है।
इस अवसर पर एमआईए के सदस्यों ने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। इनका कहना था कि कच्चे माल की कीमत निर्धारित करने के लिए केंद्र सरकार को व्यवस्था बनानी चाहिए। पहले इसके लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी यानी जेपीसी थी। जिसे खत्म कर दिया गया। उद्योगपतियों का कहना था कि यह सामान्य स्थिति नहीं है, इसके पीछे जरूर कोई जोड़-तोड़ है, जो सरकार और बढ़े औद्योगिक घरानों के बीच चल रहा है। इनका कहना था कि एमएसएमई सेक्टर देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। औद्योगिक क्षेत्र में 45 से 50 प्रतिशत रोजगार एमएसएमई सेक्टर से मिलता है। मोहाली के उद्योगपतियों का कहना था कि एक ओर तो केंद्र सरकार एमएसएमई सेक्टर को मजबूत कर मेक इन इंडिया की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर अपनी नीतियों से एमएसएमई सेक्टर को बर्बाद करने पर तुली है। इन लोगों ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित कर उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के लिए अगले दस दिन में केंद्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए तो मोहाली की 9 हजार एमएसएमई इकाईयों को पक्के तौर पर ताला लगा दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो इन 9 हजार इकाईयों से इन इकाईयों से आजीविका हासिल करने वाले 6 लाख से ज्यादा लोगों के लिए संकट पैदा हो जाएगा। करीब साढ़े तीन लाख लोग तो इन इकाईयों से सीधे तौर पर रोजगार हासिल कर रहे हैं। जो एक झटके में बेरोजगार हो जाएंगे।
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