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Womens Day: 'अपराजिता' बोलीं- महिलाओं को समझें पुरुष तो दे पाएंगे मान, खत्म हो जाएगा भेदभाव

Sun, 08 Mar 2020 11:38 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
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संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने आईं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शनिवार को ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माईल’ के बैनर तले शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मोहाली के खालसा कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सफल महिलाओं ने शिरकत कीं। महिला दिवस की सार्थकता और चुनौतियां विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए इन सभी ने महिलाओं के सामने चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं को छुआ।
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सभी महिलाओं का साझे तौर पर मानना था कि जिम्मेदारी के साथ आत्मविश्वास हो तो हर चुनौती को सफलता की कुंजी बनाया जा सकता है। सभी ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियों को बयां करते हुए महिला दिवस की सार्थकता पर कहा कि हर दिन महिला का है, लेकिन इस एक दिन के लिए अगर सरकार और समाज महिलाओं के संघर्ष को सार्थक बनाने के लिए कुछ करे तो समाज से भेदभाव समाप्त हो जाएगा। विभिन्न क्षेत्र की इन सफल महिलाओं को ‘अमर उजाला’ ने महिला दिवस के अवसर पर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्मानित किया। सभी ने इसे अपने लिए एक यादगार पल बताया।

आज महिलाएं सशक्त हो रही हैं, लेकिन फिर भी काफी कुछ छूट गया है। समाज में एक संघर्ष है, इस संघर्ष को चुनौती मानकर लड़कियों को अपने परिजनों के प्रयासों का सम्मान करते हुए अपनी पहचान बनानी चाहिए। जरूरत है यह जानने की, कि हम क्या कर सकते हैं। हमें समाज की मनोवृति को बदलना होगा। मैंने भी अपने संघर्ष के दौरान समाज की सोच को बदलने की कोशिश की और इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली। महिला के बिना समाज अधूरा है, महिला दिवस मानने का सही अर्थ तभी है जब इस दिन सरकार और समाज अपनी जिम्मेदारी को समझें।
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- डॉ. हरीश कुमारी, प्रिंसिपल खालसा कॉलेज

सही मायनों में महिला को सशक्तिकरण की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि महिला से ही जीवन की शुरूआत होती है। महिला वहां कमजोर हो जाती है जब वो समाज द्वारा थोपी गई बेमानी मान्यताओं को ढोना शुरू कर देती है। नई सोच और नए परिवेश से महिलाओं को कभी परहेज नहीं करना चाहिए। उन्हें इन चीजों को सार्थक ढंग से अपनाना चाहिए। समाज में आज भी ऐसे लोग हैं जो लड़कियों की प्रगति पर तंज कसते हैं। इस तंज को चुनौती की तरह लेकर अपने आत्मविश्वास के बूते सफल होकर ऐसे लोगों को जवाब दिया जाना चाहिए।
- मिली गर्ग, एलोरा मिसेज इंडिया 2019

समाज में महिला आरक्षण की बात होती है। आरक्षण के आधार पर महिलाएं जनप्रतिनिधि तो चुनी जाती हैं, इसके बावजूद उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती। आरक्षण का लाभ तभी है जब महिलाएं अपनी ड्यूटी को लेकर जागरूक हों। बेटियां अपनी शिक्षा के दौरान अपनी रुचि का खास तौर पर ध्यान रखें। तंज को चुनौती की तरह लें तो वहीं प्रेरणा का आदर करें। समाज आज भी महिलाओं को कई क्षेत्रों के लायक नहीं समझता। इस सोच को बेटियां अपने आत्मविश्वास के बल पर बदल सकती हैं।
- सुखविंदर कौर सरोया, सीनियर लीगल एडवाइजर, पीएसईबी

नारी ने रचा विधान है, नारी तुम्हें मेरा शत-शत प्रणाम है। इन पंक्तियों के साथ महिला शक्ति का जिक्र करते हुए वैदिक काल का उदाहरण दिया। आज भी धार्मिक कार्य महिलाओं के बिना पूरे नहीं होते। धीरे-धीरे समाज में कुरीतियों ने घर कर लिया। यह कुरीतियां महिलाओं को अन्दर ही अन्दर कचोटती रहीं। समाज ने प्रगति की तो महिलाओं को आरक्षण सहित कई सुविधाएं दी गईं। महिलाओं को आरक्षण नहीं समानता चाहिए। जब भी मौका मिला हर क्षेत्र में महिलाओं ने पुरुषों के बराबर अपनी पहचान बनाई। बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन असल फायदा तभी है, जब जमीन पर इसका नतीजा नजर आए।
- डॉ. उमा शर्मा, रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर, पंजाब पब्लिक रिलेशन (पीपीआर)
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लड़कियों को बचाना है तो उनकी सुरक्षा और सेहत पर ध्यान देना होगा। साथ ही उन्हें पढ़ाई के बराबर मौके देने होंगे। लड़कियां समाज का स्तंभ है, स्तंभ मजबूत होगा तो समाज आगे बढ़ेगा। जब पंजाब, हरियाणा और यूपी में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ सऩ 1990 में जंग शुरू की थी तो उस समय उम्र सिर्फ 16 साल थी। अब तक 802 कन्या भ्रूण हत्या होने से रोक चुकी हूं और खुद भी दो बेटियों की मां हूं। बेटियों को कभी भी लड़कों से कम नहीं समझा। उन पर अपने फैसले नहीं थोपे, बल्कि उनको खुद करियर चुनने की आजादी दी।
- रंजना मिश्रा, संस्थापक, स्वॉस संस्था

महिलाओं के बिना दुनिया अधूरी है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसमें महिलाएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन न कर सकें। आज हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी पहचान अपने बूते पर बनाई है। महिला के बिना समाज का सृजन संभव नहीं। महिला ही वह पहली पाठशाला है जो बच्चे को समाज से रूबरू करवाती है। जब एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा समाज शिक्षित होता है। जरूरत है महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की। सरकार के प्रयास इसके लिए काफी नहीं हैं, जब तक परिवार और समाज अपनी सोच नहीं बदलेंगे यह संघर्ष रहेगा।
- जसप्रीत कौर गिल, पार्षद व जनरेशन सेवियर एसोसिएशन की प्रधान

महिला सशक्तिकरण की चाहे जितनी भी बातें कर ली जाएं, पर यह सब एक वर्ग तक सीमित है। आज भी समाज का एक बड़ा तबका उस हद तक पुरुष प्रधान सोच का शिकार है, जहां महिलाओं के साथ गुलाम की तरह व्यवहार किया जाता है। इसके बावजूद इस तबके की महिलाएं खुद को परिवार के लिए झोंक देती हैं। महिलाएं जब तक आत्मनिर्भर नहीं बनेंगी, तब तक वह इस दलदल से बाहर नहीं निकल पाएंगी। ऐसी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे आना चाहिए जो सशक्त हैं।
- प्रीति अरोड़ा पाठक, डिस्ट्रिक मैनेजर, दीनदयाल अंत्योदया योजना-नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन

महिला दिवस की सार्थकता तभी है, जब समाज महिलाओं का सम्मान करे। कामयाब महिलाओं को समाज में सम्मान मिलने लगा है, लेकिन अभी भी समाज उस सोच पर नहीं आया जो सभी महिलाओं को समान सम्मान और मौके दे। महिलाएं आज देश और समाज की प्रगति के लिए हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, वो चाहे राजनीति हो, कला हो, खेल हो या अन्य प्रशासनिक सेवाएं। एक पुरुष के जीवन में महिला का बहुत बड़ा योगदान है। एक मां, बहन, पत्नी व बेटी के रूप में। समाज को अपनी सोच बदल कर सभी के लिए समान मौके बनाने होंगे।
- जसप्रीत कौर मोहाली, युवा पार्षद
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