मोहाली। सीनियर नेता एवं पंजाब विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर वीर दविंदर सिंह का कहना है कि उन्हें जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने बर्खास्त नहीं किया है। सच्चाई यह है कि उन्होंने खुद ही 7 जुलाई 2020 को अकाली दल टकसाली छोड़ा था। यह फैसला उन्होंने पंथ व पंजाब के हितों को ध्यान में रखकर किया था।
उन्होंने कहा कि त्याग पत्र देने के 10 दिन बाद जत्थेदार ब्रह्मपुरा द्वारा इस तरह का बयान देना बेतुका है। इस तरह के बयानों में उनकी बीमार मनोवस्था की झलक पड़ती है। वीर दविंदर सिंह ने यह भी साफ किया है कि जब शिरोमणि अकाली दल टकसाली की स्थापना हुई थी। उस समय वह अकाल तख्त पर साहिब पर हाजिर नहीं थे। ऐेसे में अकाल तख्त पर किसी तरह की ली शपथ या अरदास को तोड़ने का सवाल नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि जत्थेबदार ब्रह्मपुरा जो कुछ भी गत समय से कर रहे हैं, उससे केवल बादल परिवार के उदेश्यों की पूर्ति हो रही है।
वीर दविंदर ने आखिर में कहा कि वह जत्थेदार ब्रह्मपुरा का दिल से सत्कार करते हैं। उनकी बढ़िया सेहत की कामना करते हैं। मेरी दिली इच्छा है कि वह जिद का त्याग करके पंथक एकता की सरपरस्ती करे। साथ ही बादल परिवार व कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक से हटाने में अपनी मोहरी भूमिका निभाए।