मोहाली। दंपती ने एक आवेदक को एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में खरीदे जाने वाले प्लॉट में 25 फीसदी शेयरधारक बनाने का लालच देकर धोखाधड़ी से रुपये ऐंठने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दंपती ने आवेदक को कंपनी में डायरेक्टर तो बना दिया, लेकिन उसे जरूरी शेयर होल्डिंग नहीं दी। अब जबकि प्लॉट की कीमत 4 गुना से ज्यादा बढ़ गई है, आवेदक के रुपये करीब 4 साल तक इस्तेमाल करने के बाद सिर्फ शुरुआती रकम ही वापस कर दी जबकि कानून के अनुसार आवेदक को लाभ सहित यह राशि वापस करनी चाहिए थी। इस मामले में आईटी सिटी थाना पुलिस ने शिकायतकर्ता अनु जिंदल की शिकायत पर दंपती अतुल गोसैन व स्वाति गोसैन निवासी सिग्नेचर टावर सेक्टर -66ए मोहाली के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अतुल गोसैन और उनकी पत्नी स्वाति गोसैन आईटी से संबंधित व्यवसाय करते हैं। वे पहले अमेरिका में रहते थे, लेकिन अब भारत में रहते हैं। उनकी एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी है जिसमें दोनों निदेशक हैं। अतुल गोसैन और स्वाति गोसैन की शिकायतकर्ता अनु जिंदल और उनके पति सुमित जिंदल के साथ पारिवारिक मित्रता थी। सेक्टर- 83 आईटी सिटी मोहाली में कुछ भूखंडों को गमाडा ने ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से केवल आईटी व्यवसाय करने वाली एक फर्म को बेचा जाना था। अतुल गोसैन और स्वाति गोसैन भी एक भूखंड खरीदना चाहते थे। इस प्लॉट में 50 फीसदी शेयरधारक बनाने के लिए दोनों ने सुमित जिंदल और अनु जिंदल से बात की। यदि सुमित जिंदल और अनु जिंदल जो पहले से ही रियल एस्टेट का कारोबार कर रहे थे, 25 फीसदी शेयरधारक बनने के लिए सहमत हुए। रियल एस्टेट के कारोबार में सुमित जिंदल के साझेदार राजेश अरोड़ा थे। अतुल गोसैन ने उन्हें 25 फीसदी शेयरधारक बनने की पेशकश की, फिर राजेश अरोड़ा सहमत हो गए। आवेदक अनु जिंदल और नीतू अरोड़ा पत्नी राजेश अरोड़ा अतुल गोसैन, स्वाति गोसैन और राकेश खुराना ने आवेदक अनु जिंदल और नीतू अरोड़ा को 19 नवंबर 2020 को एमओजी ऑनलाइन कंपनी में निदेशक बनाया। एमओजी ऑनलाइन कंपनी ने 5 लाख रुपये की शुरुआती राशि (बयाना राशि) जमा करके ऑनलाइन बोली लगाई और 26 फरवरी 2020 को प्लॉट नंबर आई-22 सेक्टर -83 आईटी सिटी मोहाली 8,95,99,628 रुपये का भुगतान किया गया और उसी दिन आशय पत्र जारी कर दिया गया। आशय पत्र आवेदन की तिथि से 90 दिनों के भीतर जारी किया गया था। अतुल और स्वाति ने अनु जिंदल और नीतू अरोड़ा को एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक बनाया था, लेकिन उन्हें कंपनी में कोई शेयरधारिता नहीं दी गई थी। आवेदक अनु जिंदल द्वारा यह सिद्ध किया गया कि प्रारंभिक राशि (बयाना राशि) जमा करते समय कुल मूल्य का 15 फीसदी वार्षिक किश्तें जमा करते समय, उनके 25 फीसदी हिस्से के अनुसार देय राशि प्रत्येक किश्त के भुगतान के समय एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा की गई थी।
आईटी सिटी थाना के एसएचओ सतविंदर सिंह के अनुसार अतुल गोसैन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण झूठा है। याचिकाकर्ता अनु जिंदल द्वारा एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 1 करोड़ 71 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं। जिसके सभी शेयर अतुल गोसैन और स्वाति गोसैन के पास हैं और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने का अधिकार केवल अतुल गोसैन के पास है। एमओजी ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड ने करीब 9 करोड़ रुपये में प्लॉट खरीदा था, जबकि इसकी मौजूदा कीमत करीब 40 करोड़ रुपये है। उक्त प्लॉट में आवेदक अनु जिंदल का हिस्सा 25 फीसदी है, तो कुल कीमत में उसका हिस्सा करीब 10.50 करोड़ रुपये होता है। वह बाकी बकाया किश्तों में अपना हिस्सा देने को तैयार है। पुलिस ने जांच अनुसार दोनों पति-पत्नी को आरोपी पाया जिसके चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।