जीवन में परिवर्तन शोध एवं अनुसंधान से आता है। ऐसे में देश के सभी रिसर्च संस्थानों में रिसर्च पर जोर दिया जाएगा। समाज की जरूरतों के हिसाब से संस्थानों में रिसर्च की जाएगी। इससे क्वालिटी रिसर्च भी होगा। वहीं, प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया का सपना भी सच होगा। यह बात शुक्रवार को सेक्टर-81 स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को कही।
उन्होंने बताया कि संस्थान में आईआईएसईआर काउंसिल की बैठक हुई। इसमें भोपाल, मोहाली, तिरुवनंतपुरम, पुणे व कोलकाता के डायरेक्टर और चेयरमैन शामिल हुए। वहीं, बंगलूरू इंडियन इंस्टीट्यूट साइंस के डायरेक्टर और चेयरमैन भी शामिल हुए।
जावड़ेकर ने बताया कि बीते दस साल में संस्थान विज्ञान की शोध की संस्था के रूप में उभरी हैं। सैकड़ों पेटेंट फाइल हुए हैं। संस्थान के छात्रों और फैकल्टी के आर्टिकल इंटरनेशनल पेपर में पब्लिश हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर आईआईएसईआर में भी शोध के लिए प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति देने की योजना है। यह स्कॉलरशिप अगले साल से शुरू हो जाएगी।
शोध एवं अनुसंधान पर बल देते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आईआईटी, आईआईएम और आईआईएसईआर जैसे गौरवशाली शिक्षा संस्थानों को संयुक्त प्रयासों से अपने अंतरराष्ट्रीय मानक में सुधार करने की योजना बनाई गई है। वहीं, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब भारतीय कंपनियां भी रिसर्च पर पूरा फोकस कर रही हैं। उन्हें भी पता है कि अगर कुछ नया करेंगी, तभी इंटरनेशनल मार्केट में टिक पाएंगी।
‘चार महीने में तैयार हो जाएगी नई एजुकेशन पॉलिसी’
देश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए नई एजुकेशन पॉलिसी बनाई जा रही है। आने वाले तीन चार महीनों में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। पॉलिसी को लेकर विभिन्न चरणों में छात्रों, शिक्षाविदों, इंडस्ट्री के लोगों से विचार-विमर्श कर उनकी राय जानी जा रही है। इसके अलावा हर व्यक्ति पॉलिसी में अपनी राय दे पाएं। इसके लिए लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। तीस सितंबर तक लोग अपने सुझाव मंत्रालय को भेज पाएंगे। यह बात शुक्रवार को सेक्टर-81 स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मीडिया से बातचीत में कहीं। मंत्री ने बताया कि पॉलिसी के लिए काफी समय से काम चल रहा है। जैसे ही लोगों के सुझाव आएंगे, उसके बाद छह अक्तूबर को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ भी बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, बुनियादी सुविधाओं, छात्र केंद्रित पहल, आंतरिक संसाधन निर्माण व ई-गवर्नेंस में गुणवत्ता सुधार के लिए किए गए कार्यों और प्रस्तावित कार्यों पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद लोगों से आए सुझावों को स्कैन किया जाएगा। साथ ही शिक्षाविदों के साथ बैठक कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे पहले सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ बैठक की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश यह है कि युवाओं को बढ़िया और जरूरी शिक्षा मिले।
नई यूनिवर्सिटी को लेकर बनेंगे नए नियम
विभिन्न राज्यों में बढ़ रही निजी विश्वविद्यालयों की संख्या के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एक तो बात साफ है कि दो तरह से यूनिवर्सिटी बनती हैं। केंद्र या राज्य की तरफ से, इसको लेकर भी वह मंथन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई यूनिवर्सिटी के लिए नए नियम बनाए जाएंगे। ताकि लोगों को बढ़िया शिक्षा मिल पाएगी। अच्छा काम करने वाले संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने का प्रस्ताव है। जबकि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की योजना है।
कश्मीर के लोगों की आशाओं को पूरा किया जाना चाहिए
सेक्टर-81 स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में शुक्रवार को पहुंचे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर विद्यार्थी और फैकल्टी से भी रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। इस बीच संस्थान में पीएचडी स्कॉलर मेरठ निवासी पीयूष मिश्रा ने मंत्री को बताया कि वह कश्मीर की रोजाना लाइफ पर करीब चार साल से स्टडी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि आतंकवादियों ने हमारे देश के वीर सैनिकों को उड़ी में मारा है, लेकिन कश्मीर के हालत भी ठीक नहीं हैं। वहां पर कर्फ्यू लगने से पूरी तरह से जनजीवन प्रभावित हुआ। ऐसे में हालात कैसे सामान्य होंगे। इस पर मंत्री ने उस समय तो ज्यादा जवाब नहीं दिया, लेकिन जब मीडिया ने इस सवाल को आधार बनाया तो उन्होंने कहा कि कश्मीर हमारे देश का अभिन्न अंग है। कश्मीर के लोगों की आशाएं हैं, उनको पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कश्मीर में 3800 छात्राओं को प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप दी गई है। जबकि जम्मू-कश्मीर के 1800 छात्र इंजीनियरिंग में दाखिला लिया है।