मोहाली। शहर में करोड़ों रुपये की लागत से लोगों की सुविधा के लिए बिछाई जा रही सीवरेज लाइन में हो रही देरी अब सभी के लिए मुसीबत बन गई है। क्योंकि सीवरेज लाइन बिछाने के लिए सड़क किनारे की गई खुदाई हादसों को न्योता दे रही है। यहां कई वाहन चालक हादसों का शिकार भी हो चुके हैं। इस मामले में अब समाज सेवी एवं गमाडा से सेवानिवृत्त एक्सईएन एनएस कलसी आगे आए हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर नगर निगम के कमिश्नर को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला है कि पाइप डालने के बाद भी तक सड़क बनाने के लिए टेंडर तक नहीं हुआ है। उन्होंने निगम को सलाह दी है कि सड़क का टेंडर और काम की प्रक्रिया को तुरंत किया जाए। इसके साथ ही जब तक सड़क का निर्माण नहीं होता है, तब तक उस सड़क से ट्रैफिक की आवाजाही बिल्कुल रोक दी जाए।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम की ओर से करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया। यह लाइन शहर की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण रोड शाहीमाजरा से नाइपर होते हुए फेज-11 की ओर जाती है। इस सड़क की एक तरफ से पूरी तरह से खुदाई की गई है, इस कारण पिछले छह महीने से लोगों को दिक्कत आ रही है। जो लोग इस सड़क से आवाजाही कर रहे हैं उनको हादसे का हमेशा ही डर बना रहता है। इतना ही नहीं इस वजह से फेज-7 में एजुकेशन बोर्ड की ट्रैफिक लाइटों से होकर जाने वाले वाहन चालकों को यातायात जाम में फंसना पड़ता है। कलसी ने अपने पत्र में लिखा है कि कुुंभड़ा लाइट प्वाइंट से लेकर फेज-5 तक सड़क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। सड़क के दोनों तरफ ही शहर बसा हुआ है। इतना ही नहीं इन एरिया से चंडीगढ़ और मार्केट जाने वाली सड़के भी इस सड़क को क्रास करती है। ऐसे में करीब 5 से 8 किलोमीटर के ट्रैक को पहल के आधार पर सुधारा जाए।
उन्होंने इस दौरान कुछ दुर्घटना ग्रस्त वाहनों की फोटो भी नगर निगम कमिश्नर को शिकायत के साथ भेजी है। उनका कहना है कि इस सड़क को तुरंत बनाया जाए और साथ ही खामियों को दूर किया जाए। बता दें कि सड़क की खुदाई वाली सीवरेज लाइन के मामले को अमर उजाला की ओर से अपने गत अंकों में गंभीरता से उठाया गया है।
40 साल पहले बिछाई सीवरेज लाइन दे गई जवाब
जानकारी के मुताबिक यह जो आउटफॉल सीवरेज लाइन बिछाई जा रही है। यह शहर के लिए बड़ी महत्वपूर्ण है। क्योंकि 40 साल पहले जब शहर बसा था तो उस समय यह सीवरेज लाइन बिछाई गई थी। लेकिन अब लाइन पूरी रह से जवाब दे गई है। कई जगह से यह लाइन धंस जाती है। जिससे सीवरेज बैक मारना शुरू कर देता है। इतना ही नहीं कई एरिया में यह लाइन घरों के पास से निकलती है। ऐसे में वहां पर हादसे होने का डर बना रहता है।
टेलीफोन कंपनियों ने पहुंचाया नुकसान
जानकारी के मुताबिक उक्त सीवरेज लाइन को सबसे ज्यादा नुकसान टेलीफोन कंपनियों ने भी खुदाई करके पहुंचाया है। क्योंकि जब अंडरग्राउंड लाइन शहर में डाली जा रही थी। दस दौरान उनकी ओर से की गई खुदाई में लाइन कई जगह से टूट गई थी। यह मामला काफी गर्माया भी था। हालांकि इसके बाद कंपनियों पर भी नजर रखने की योजना बनी थी। लेकिन कंपनियों ने यह काम छुट्टियों वाले दिनों में शुरू कर दिया था।
एक नजर में प्रोजेक्ट
जानकारी के मुताबिक सीवरेज लाइन के इस प्रोजेक्ट पर 22 करोड़ रुपये की लागत आनी है। यह पाइप लाइन फेज-1, 2, 3बी1, 3बी2 और 4 से लेकर फेज-11 तक डाली जा रही है। जबकि 40-45 साल पुरानी सीवरेज लाइन ब्रिक डारट सिस्टम पर आधारित थी। यह पाइप लाइन 9.9 किलोमीटर लंबी है। प्रोजेक्ट में 24 इंच से 48 इंच मोटी पाइप लाइन डाली जाएगी। इस प्रोजेक्ट के तहत बाबा बंदा सिंह बहादुर न्यू बस टर्मिनल से सेक्टर-64, 65, 66 से 67 तक के चौक पर आउट फॉल सीवरेज नया डाला जाएगा और यह काम 9 महीने में पूरा करना होगा।