धरना दे रहे लोगों को उठाती पुलिस।
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जीरकपुर। शनिवार सुबह 7 बजे कुरुक्षेत्र से आए गुस्साए लोगों ने हाईवे के लिए एक्वायर जमीन का मुआवजा न मिलने पर चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे जाम कर दिया। इस कारण यहां आध घंटे तक वाहनों की कतारें लग गईं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं, दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नेशनल हाईवे जाम करने के लिए उन्होंने एसएसपी मोहाली को सूचित किया था।
हाथों में बैनर पकड़े प्रदर्शनकारी कहने लगे कि ‘नेशनल हाईवे हमारी मलकीयत है’ हमारी जमीन खाली करो। एसएचओ बराड़ ने प्रदर्शनकारियों से नेशनल हाईवे पर जाम लगाने का कारण पूछा जिस पर उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे बनाने के लिए सरकार ने उनकी जमीन एक्वायर की थी, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी उनको जमीन का मुआवजा नहीं मिला। स्थिति तनावपूर्ण होने पर एसएचओ ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद नायब तहसीलदार पुनीत बंसल मौके पर पहुंचे और उन्हें प्रदर्शन बंद करने की अपील कर तहसील दफ्तर बुलाया। प्रशासन से मिले आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने जाम खोल दिया।
शिकायत पर भी नहीं हो रही सुनवाई
प्रदर्शनकारी रणजीत सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 में किशनगढ़ गांव की करीब एक किला जमीन जोकि बहादुर सिंह, महिंदर सिंह, सुरिंदर सिंह व हरजीत सिंह के नाम पर थी। जब सरकार ने नेशनल हाइवे -21 के लिए जमीन एक्वायर करनी शुरू की तो उनकी जमीन भी एक्वायर की गई थी, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद अब तक उनको एक्वायर की गई जमीन का मुआवजा नहीं मिला। जमीन के मुआवजे के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी, जीएमआर कंपनी, एसडीएम डेराबस्सी को लिखित शिकायत भी कर चुके हैं और कई बार मिल भी चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास उनकी जमीन के खसरा नंबर का मुआवजा नहीं है जो दफ्तरी गलती के कारण रिकॉर्ड में शामिल नहीं है।
कोट्..
मुझे सुबह करीब सवा सात बजे फोन आया था कि कुछ लोगों ने हाईवे जाम किया है। लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि 15 साल पहले नेशनल हाईवे के लिए उनकी करीब एक किला जमीन एक्वायर हुई थी, जिसका उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। उन्हें तहसील दफ्तर बुलाया गया था और लिखित में शिकायत देने को कहा है। सोमवार को वह लिखित शिकायत एसडीएम दफ्तर में देंगे। -पुनीत बंसल, नायब तहसीलदार