मोहाली। ट्रिब्यूनल ने एक सड़क हादसे में पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जनवरी 2023 का है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में दो साल बाद फैसला सुनाया है, जिसमें पीड़ित परिवार को ट्रिब्यूनल ने 20.75 लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
एरोसिटी लाइट पॉइंट के पास बाइक पर जा रहे एलआईसी एजेंट को एक टिप्पर ने पीछे से टक्कर मार दी थी। जीएमसीएच-32 में उसकी मौत हो गई थी। परिवार ने मुआवजे के लिए केस लगाया था। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि हादसा टिप्पर चालक की लापरवाही से हुआ है, इसलिए परिवार मुआवजे का हकदार है।
कोर्ट में सुनवाई में सुशीला रावत निवासी डेराबस्सी की ओर से पेश हुए वकील ने बताया कि उनके क्लाइंट के पति जय सिंह (53) एलआईसी में एजेंट थे। इसके अलावा वह एक आयरन स्टोर में सुपरवाइजर थे। वह तीन जनवरी 2023 को बाइक पर आ रहे थे कि एरोसिटी के पास पीछे से आ रहे अनियंत्रित टिप्पर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस कारण वह जख्मी हो गए। उन्हें जीएमसीएच-32 ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ब्रॉट डेड घोषित कर दिया। हादसे के बाद चालक मौके से टिप्पर समेत भाग गया था। पति की मौत के बाद से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। जय सिंह की मौत के बाद से उनके बेटे दिशु यादव और ऋषभ रावत अनाथ हो गए हैं। बच्चों के पालन-पोषण के लिए सुशीला रावत को मुआवजे की जरूरत है। हादसा टिप्पर चालक की लापरवाही से हुआ है इसलिए उन्हें मुआवजा दिया जाए।
कोर्ट में टिप्पर के चालक रविंदर सिंह वासी गांव काकेरी जिला जौनपुर (उत्तर प्रदेश) और टिप्पर के मालिक राजन वासी गांव बिल्ला जिला पंचकूला (हरियाणा) ने बताया कि उनके टिप्पर से ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ है। झूठा मुआवजा लेने के चलते परिवार ने झूठी एफआईआर दर्ज करवाई है इसलिए केस रद्द किया जाए लेकिन वे इस संबंध में कोई गवाह पेश नहीं कर पाए।