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मोहाली: माइनस पांच डिग्री तापमान में तीन दिन पैदल चलकर पोलैंड सीमा पर पहुंचा जीरकपुर का मनदीप

Wed, 02 Mar 2022 01:52 AM IST
मोहाली ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जीरकपुर (पंजाब)

सार

पोलैंड सीमा पर समाजसेवी संस्था खालसा ऐड ने लंगर लगाया है। यहां पर खाना खाया है। सुखवंत ने बताया कि मनदीप सिंह की चिंता में पूरा परिवार दुखी है और उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
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मनदीप सिंह का परिवार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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यूक्रेन और रूस की जंग में फंसे हजारों भारतीय विद्यार्थी घर वापसी के लिए तड़प रहे हैं। इनको वापस लाने की सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। यूक्रेन में जीरकपुर के भी कई विद्यार्थी फंसे हैं। लोहगढ़ निवासी मनदीप सिंह करीब चार महीने पहले पढ़ने यूक्रेन गया था, जो कीव में रह रहा था। लेकिन युद्ध की वजह से उसे कीव छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए पैदल ही पोलैंड बॉर्डर पर जाना पड़ा। इसके लिए उसने अपने छह अन्य साथियों के साथ कीव से पोलैंड तक का सफर पैदल ही तय किया। 

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मनदीप सिंह के भाई सुखवंत ने बताया कि उसका छोटा भाई चार महीने पहले पढ़ने यूक्रेन गया था लेकिन जंग के कारण उनका परिवार सहमा हुआ है, क्योंकि भाई से पिछले चार दिन से बात नहीं हुई है। हालांकि व्हाट्सएप मैसेज आ रहे हैं। सुखवंत को उसके भाई मनदीप ने बताया कि वह तीन दिन से पैदल भूखे पेट अपने छह साथियों के साथ -5 डिग्री तापमान में सफर कर रहा है। खुले आसमान के नीचे रातें गुजरीं और मुश्किल से पोलैंड सीमा तक पहुंचा हूं। पोलैंड सीमा पर समाजसेवी संस्था खालसा ऐड ने लंगर लगाया है। यहां पर खाना खाया है। सुखवंत ने बताया कि मनदीप सिंह की चिंता में पूरा परिवार दुखी है और उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। 

यूक्रेन में फंसे छात्रों को लाने और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाए सरकार
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण अभी तक भी जिले के कई विद्यार्थी वहां पर फंसे हैं। विद्यार्थियों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए जिला प्रशासन और केंद्र सरकार उनके संपर्क में हैं। मंगलवार को नगर निगम के मेयर कुलजीत सिंह बेदी भी आगे आए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि वहां फंसे बच्चों को तुरंत सुरक्षित देश पहुंचाया जाए। साथ ही उनकी पढ़ाई के लिए उचित इंतजाम किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिजनों को दिक्कत न उठानी पड़े।
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डिप्टी मेयर ने पत्र में लिखा है कि यह समय भारत के लिए गंभीर है, क्योंकि हजारों विद्यार्थी पढ़ने के लिए यूक्रेन जाते हैं। उनके अभिभावक उनको विदेश भेजने के लिए बैंक लोन लेते हैं या अपनी प्रॉपर्टी तक बेच देते हैं। बहुत से अभिभावकोें ने किसी न किसी तरह से पैसा जुटाया था और बच्चों को यूक्रेन भेजा था लेकिन इस युद्ध ने उन सबकी कमर तोड़ दी है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि अब उनके बच्चों का क्या होगा, क्योंकि उनके बच्चे यूक्रेन में बंकरों में छिपे हैं। उनके पास खाने-पीने की दिक्कत पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है और इस मुश्किल की घड़ी में अब सरकार से ही लोगों को उम्मीद है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इस दिशा में उचित कार्रवाई करें। बता दें कि मोहाली जिले के कुछ युवा तो यूक्रेन से वापस सकुशल पहुंच गए हैं, जबकि कुछ अभी तक वहीं पर फंसे हैं। हालांकि डीसी ईशा कालिया ने बताया कि उनकी ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। अगर यूक्रेन में किसी का कोई बच्चा फंसा है तो अभिभावक हेल्पलाइन नंबर 01722219505 और 01722219506 पर सूचना दे सकते हैं।

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