मोहाली। गाय बछड़ों की पूजा का पावन त्योहार गोपाष्टमी रविवार को श्रद्घापूर्वक मनाया गया। यह पर्व गायों की रक्षा, संवर्धन एवं उनकी सेवा के संकल्प का महापर्व है। जिसे वीआईपी सिटी की विभिन्न संस्थाओं सहित गौ भक्तों ने शहर की गौशालाओं में गौ पूजन कर मनाया। कोरोना काल के कारण बड़े आयोजन नहीं हो सके, फिर भी गौ भक्तों के उत्साह में कमी देखने को नहीं मिली।
गोपाष्टमी के दिन सम्पूर्ण सृष्टि को पोषण प्रदान करने वाली गाय माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गाय-बछड़ों का पूजन किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने जिस दिन से गौचारण शुरू किया था, वह शुभ दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी का दिन था। इसी दिन से गोपाष्टमी पर्व का प्रारंभ हुआ।
वीआईपी सिटी के इंडस्ट्रियल एरिया की गौशाला सहित मटौर गौशाला में भी गौ पूजन किया गया। यहां दिन भर बड़ी संख्या में गौ भक्तों ने पहुंच कर गाय और बछड़ों की विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस मौके पर गौ पूजन करने के लिए निगम कमिश्नर कमल कुमार गर्ग भी पहुंचे। निगम कमिश्नर ने सनातन परंपरा के अनुसार गौ पूजन किया। उनके अलावा गौ सेवा कमीशन के सदस्य राजवंत राय शर्मा भी शहर की गौशालाओं में गौ पूजन के लिए पहुंचे। इंडस्ट्रियल एरिया की गौशाला का संचालन कर रहे गौरी शंकर सेवा दल के साथ ही गौ ग्रास सेवा समिति ने निगम कमिश्नर कमल कुमार गर्ग और गौ सेवा कमीशन के सदस्य राजवंत राय शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कृष्ण बने गोपाल
श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार श्री कृष्ण जब पांच वर्ष के हो गए और छठे वर्ष में प्रवेश किया तो एक दिन यशोदा माता से बाल कृष्ण ने कहा कि मइया अब मैं बड़ा हो गया हूं। अब मुझे गोपाल बनने की इच्छा है ताकि मैं गायों की सेवा करूं। यशोदा जी समझाती हैं कि शुभ मुहूर्त में मैं तुम्हें गोपाल बनाउंगी। उसी समय महाऋषि शाण्डिल्य वहां पहुंचे और भगवान कृष्ण की जन्मपत्री देखकर कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को गौचारण का मुहूर्त निकाला। तभी से भगवान श्री कृष्ण को गोपाल और गोविंद नाम मिले और गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है।