पंचकूला। माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में हरियाणा के सभी राजकीय विद्यालयों की सातवीं, आठवीं व नौंवी कक्षा के लिए शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में पंचकूला के राजकीय विद्यालयों की प्रत्येक कक्षा की 100-100 छात्राओं ने दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के तहत कुरुक्षेत्र स्थित विभिन्न स्थानों और करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान केंद्र का भ्रमण किया। नौवीं कक्षा के शैक्षणिक भ्रमण को पंचकूला जिला शिक्षा अधिकारी सतपाल कौशिक, कक्षा सातवीं और आठवीं की छात्राओं के समूह को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संध्या मलिक ने झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला परियोजना समन्वय अधिकारी डॉ. कुलभूषण शर्मा, अतिरिक्त समन्वय अधिकारी दीनदयाल भी उपस्थित रहे। थापली से कृतिका, कोटि से रुचिका, भूड़ से तम्मना, सेक्टर 19 से फिजा, राष्ट्रीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पिंजौर की सीमा, सेक्टर 7 की नेहा, राजकीय माध्यमिक विद्यालय, त्रिलोकपुर, मन्नत, देवीनगर की माउंटी ने बताया कि शैक्षणिक भ्रमण से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। इस अवसर पर छात्राओं के साथ जिला विज्ञान विशेषज्ञ पूजा, जिला एफएलएन को-ऑर्डिनेटर असिंदर कुमार, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-6 से हकीकत राय और नरेश भी मौजूद रहे।
संग्रहालय में देखी श्री कृष्ण की बाल लीलाएं
छात्राओं ने कुरुक्षेत्र में साइंस पैनोरमा में विज्ञान से संबंधित मॉडल्स व महाभारत के विभिन्न अध्यायों को प्रदर्शित करती हुई अद्भुत प्रदर्शनी देखी। इसके बाद कृष्ण संग्रहालय का भ्रमण किया। यहां भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को देखा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्थित ''धरोहर'' का अवलोकन कर अपनी संस्कृति व सभ्यता को जाना। यहां हरियाणवी वस्तुओं, उनके उपयोग, पुरातन कलाओं, वेशभूषा, आभूषण इत्यादि को देखा व विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
चित्रों में देखी आजादी की लड़ाई
छात्राओं ने कुरुक्षेत्र में 1857 की क्रांति पर बने संग्रहालय को देखा। इसे साउंड व स्टैच्यू के माध्यम से दिखाया गया। इसमें सन् 1857 की क्रांति से लेकर पूरे देश में सन् 1947 तक चले आंदोलन के बारे में जानकारी हासिल की। यहां प्रमुख घटनाओं का ब्यौरा चित्रों से दर्शाया गया है। हरियाणा गैलरी में 1857 की क्रांति में हरियाणा के योगदान और प्रदेश में तब हुई प्रमुख घटनाओं, शहीदों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। 1857 से सन् 1947 तक की प्रमुख कहानियां दिखाई गई है। बच्चों ने जाना कि इस क्रांति में हरियाणा के 3467 लोग शहीद हुए थे। एक साल तक चले संग्राम में तब कुरुक्षेत्र के भी 42 लोगों ने शहादत दी थी। उस दौरान प्रदेश के 92 गांव नष्ट हुए थे।