मोहाली। पंजाब पुलिस की ओर से हथियार और ड्रग्स रखने के मामले में गिरफ्तार गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह उर्फ दिलप्रीत बाबा को अदालत ने सुनवाई के बाद बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस हथियार और ड्रग्स की बरामदगी के बारे में अपने दावों को साबित करने में विफल रही, इस कारण बाबा को बरी कर दिया गया है।
यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरसिमरनजीत सिंह ने सुनाया। उन्होंने कथित बरामदगी का समर्थन करने वाले अपर्याप्त सबूतों के कारण आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए फैसला उसके हक में सुनाया। दिलप्रीत बाबा के वकील सीएस बावा ने तर्क दिया कि आरोप पत्र में उल्लिखित बरामदगी मनगढ़ंत थी और वह अदालत में साबित नहीं की जा सकी।
जून-2018 में हुई थी गिरफ्तारी
कुख्यात गैंगस्टर दिलप्रीत बाबा को जून-2018 में पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में सेक्टर-43 आईएसबीटी से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि भागने की कोशिश करते समय वह घायल हो गया था, उसके पैर में गोली लग गई थी, जिसके बाद उसे पीजीआई में भर्ती कराया था। इसके बाद बाबा पर आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने सेक्टर-38 में उसके घर की तलाशी ली, और ड्रग्स बरामद होने का दावा किया था। इसके अलावा, जिस कार में वह मुठभेड़ के समय सफर कर रहा था, उसमें से कथित तौर पर हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। हालांकि, पुलिस इन बरामदगी से बाबा को जोड़ने वाले निर्णायक सबूत देने में विफल रही, इस कारण उसे बरी कर दिया गया।
पुलिस पहले भी कर चुकी लापरवाही
यह पहली बार नहीं है जब पंजाब पुलिस को अपनी लापरवाही के कारण गैंगस्टरों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में संघर्ष करना पड़ा है। दिसंबर 2024 में दिलप्रीत बाबा और उनके सहयोगी सुखप्रीत बुड्ढा को गिप्पी ग्रेवाल से जबरन वसूली मामले में बरी कर दिया गया था। पुलिस ने उन पर पंजाबी गायक और अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल को धमकाने का आरोप लगाया था, जिसमें उन्हें मारे गए गायक अमर सिंह चमकीला और पंजाबी कलाकार परमीश वर्मा जैसा हाल करने की चेतावनी दी थी। 14 अप्रैल, 2018 को रंगदारी से इनकार पर बदमाशों के हमले में वह गोली लगने से घायल हो गए थे।