मोहाली। शहर की एरोसिटी को सिंगापुर की तर्ज पर बसाने का सपना दिखाने वाला गमाडा शायद अपने वादा भूल गया है। कई खबरें और शिकायतों के बाद अब जाकर गमाडा की नजर आखिरकार एरोसिटी पर पड़ ही गया। इससे अब यहां विकास की उम्मीद भी जगी है। गमाडा एरोसिटी के पार्क सुधारने जा रहा है, इस पर कुल 61.73 लाख रुपये खर्च होंगे। गमाडा ने इनकी हालत सुधारने के लिए तीन महीने का वक्त लिया है। तीन महीने बाद यहां बच्चे खेल भी पाएंगे और अन्य पार्कों की तरह झूले भी झूल पाएंगे। मरम्मत के बाद यह पार्क लोगों को सौंप दिया जाएगा। गौरतलब है कि अभी एरोसिटी के पार्क सिर्फ नाम के ही पार्क है। यहां न झूले है, न बैठने के लिए बैंच और न घूमने के लिए ट्रैक। हरियाली के नाम पर घास और झाड़ियां है। बारिश के दिनों में सांप और कीट पतंगों का यह घर बन जाते हैं। रात में तो दूर दिन में भी यहां आना सुरक्षित नहीं है कि पता नहीं कब क्या काट जाए।
कहीं पर कब्जा तो कई पार्कों की हालत खस्ता
एयरोसिटी के लोगों का कहना है कि यहां के पार्कों के कहीं पर गेट टूटे है तो कहीं जंगले, जरूरत के मुताबिक बैठने के लिए बेंच नहीं है। ब्लॉक-ई में एक पार्क में तो एक बाबा ने कब्जा किया हुआ है। कई पार्क तो ऐसे है जो नशेड़ियों का अड्डा बने हुए है। बच्चों को वहां खेलने के लिए भेजने से भी डर लगता है। कोई रेन शेल्टर नहीं है, पार्कों में घास उगी हुई है, कचरा फैला रहता है, बाउंड्री टूटी हुई है। इन पार्कों की कोई साफ-सफाई या मेनटेनेंस नहीं होती।
कोट
गमाडा ने इस कार्य को करने के लिए टेंडर जरूर जारी किया है, लेकिन ये तो वक्त ही बताएगा कि कितना खर्च होता है और कितना काम होता है। इससे पहले भी एरोसिटी के लिए 1.40 करोड़ का बजट जारी हुआ। उसका पैसा कहीं भी लगा हुआ नजर नहीं आता। यह काम सिर्फ कागजात तक ही सीमित रह जाते हैं। हमने बहुत बार कहा कि विकास कार्य करते समय रेजिडेंट्स वेलफयर एसोसिएशन को बीच में रखें, उससे खर्च का भी पता लगता है और यह कि किस चीज की कार्य की जरूरत है। गमाडा के कर्मचारी काम करके चले जाते हैं, जो नजर भी नहीं आता। - मोहन महाजन, अध्यक्ष, आरडब्लूए एरोसिटी