चार साल पहले कुराली निवासी एक युवक की दुष्कर्म के बाद हत्या और शव छिपाने के मामले में जिला अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मुजफ्फरपुर, उत्तर प्रदेश निवासी राहुल कुमार को हत्या, दुष्कर्म और साक्ष्य नष्ट करने का दोषी ठहराया।
अदालत ने कहा कि भले ही मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करती है।
मार्च 2022 में हुआ था लापता
सरकारी वकील के अनुसार, 31 मार्च 2022 की रात कुराली के रोपड़ रोड निवासी सोनू घर से निकला था और वापस नहीं लौटा। दो अप्रैल को उसकी मां माया ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में सामने आया कि सोनू को आखिरी बार राहुल कुमार के साथ देखा गया था। आठ अप्रैल 2022 को पुलिस ने निहोलका गांव से राहुल को गिरफ्तार किया।
जांच में खुलासा हुआ कि राहुल और सोनू के बीच पैसों को लेकर विवाद था। राहुल ने अपने मालिक से दो हजार रुपये और मोटरसाइकिल ली। उसने रिश्तेदार की मौत का बहाना बनाकर सोनू को अपने साथ ले गया। रास्ते में उसने सोनू का मोबाइल बंद कर दिया और अपना मोबाइल छिपाकर फ्लाइट मोड पर डाल दिया ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके।
वारदात और शव छिपाने का तरीका
आरोपी सोनू को गांव चिंतगढ़ स्थित एक ट्यूबवेल के मोटर रूम में ले गया। वहां उसने सोनू को जमकर शराब पिलाई। जब सोनू नशे में बेसुध हो गया, तो राहुल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। रात करीब दो बजे उसने मुंह और सांस दबाकर सोनू की हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने मौके से खून के निशान मिटाने की भी कोशिश की।
अगली रात आरोपी ने शव को खाद के दो बोरों में भरा। उसने रस्सी से बोरों को साइकिल के कॅरिअर पर बांधा और गांव चिंतगढ़ के श्मशान घाट में पराली के नीचे छिपा दिया। चार अप्रैल 2022 को सीवरेज का पानी निकालने पहुंचे ग्रामीणों को बदबू आई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने पराली के नीचे से सड़ी-गली अवस्था में शव बरामद किया, जिसकी बाद में परिजनों ने सोनू के रूप में पहचान की।
परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने आधार
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह न होने की दलील दी। हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों को विश्वसनीय माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से साबित हुआ कि सोनू आखिरी बार राहुल के साथ ही देखा गया था। आरोपी यह नहीं बता सका कि वह सोनू से कब और कहां अलग हुआ। राहुल की निशानदेही पर मोटर रूम से मृतक का मोबाइल, चप्पलें, हत्या में प्रयुक्त साइकिल और रस्सी बरामद हुई। फोरेंसिक जांच में आरोपी के कपड़ों और मोटर रूम से मिले खून के नमूने मृतक के खून से मेल खा गए।
एक मजदूर ने भी अदालत में गवाही दी कि उसने एक अप्रैल की रात राहुल को साइकिल पर भारी बोरी ले जाते देखा था। अदालत ने कहा कि इन सभी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी आरोपी के अलावा किसी अन्य संभावना की ओर इशारा नहीं करती। इसी आधार पर राहुल कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।