फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली। विजिलेंस के एआईजी को 50 लाख रुपये रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पूर्व उद्योगमंत्री सुंदर शाम अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि विजिलेंस ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-9 स्थित एक कंपनी और जेसीटी कंपनी को कोड़ियों के भाव जमीन बेचने में उनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस की टीम ने अपना फिजीकल सर्वे पूरा कर लिया है। वहीं, प्लॉट काटने में किस तरह खेल हुआ है, इसके तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
विज्ञापन

इसके साथ ही उक्त जमीन को खरीदने वालों के मंत्री से रिश्ते की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस के पास दोनों कंपनियों को सस्ते दामों पर जमीन बेचने समेत कई शिकायतें पहुंची हैं। इतना ही नहीं जब विजिलेंस ने पूर्व उद्योगमंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को जांच के लिए बुलाया था तो उनसे जेसीटी कंपनी के बारे में ही सवाल पूछे जा रहे थे। सूूत्रों की मानें तो जांच के दौरान वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे। इसके बाद जैसे ही विजिलेंस ने उन्हें पूछताछ के बाद भेजा था, तो उन्होंने मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बना डाली थी। साथ ही विजिलेंस ने उन्हें ट्रैप लगाकर काबू कर लिया था। इतना ही नहीं विजिलेंस को पूरा संदेह है कि उक्त कंपनियों को बेचने में खेल हुआ है। ऐसे में विजिलेंस हर तथ्य की गंभीरता से जांच कर रही है। जल्द ही पूरी कार्रवाई करने के बाद केस को डीए लीगल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि उक्त दोनों कंपनियों को काफी सस्ते दामों पर जमीन बेचने का मामला कांग्रेस सरकार के समय में भी उछला था। साथ ही उस समय इस मामले की सीबीआई जांच की मांग उठी थी। इतना ही नहीं इसके बाद जब कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था तो उस समय मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को उनके मंत्री मंडल में जगह तक नहीं मिली थी।
विज्ञापन

अरोड़ा निजी कंपनी की तरफ चलाते थे विभाग को
विजिलेंस को पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े हुए कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। सूत्रों से पता चला है कि सुंदर शाम अरोड़ा की ओर से इंडस्ट्री विभाग को जारी किया गया वह पत्र भी जांच में शामिल किया है, जिसमें उन्होंने विभाग में होने वाली छोटी से छोटी चीज के अधिकार अपने पास रखे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक वह विभाग को एक निजी कंपनी की तरह चला रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें