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अब किसान आंदोलन के झंडे और स्टिकर बन रहे लोगों की कारों की शान

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किसान की गाड़ी पर लगा स्टिकर। - फोटो : MOHALI
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मोहाली। वीआईपी शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों पर आजकल पंजाबी गायकों के या यूके और कनाडा के झंडे के स्टिकर लगे हुए नहीं दिख रहे। इलाके के लोग अब किसान आंदोलन के रंग में रंगे हुए हैं। लोग अपनी महंगी कारों के आगे किसान यूनियनों के झंडे या स्टिकर लगाने में अपनी शान समझ रहे हैं। इतना ही नहीं ऐसा कर वह अन्नदाता के साथ होने का सबूत भी दे रहे हैं। यहां तक कि इससे पहले वीकेंड पर जो लोग घूमने के लिए कसौली, शिमला या नाराकंडा जाते थे। लेकिन अब वह अपने यारों के साथ दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में सहयोग देने के लिए निकल रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक पंजाब के वीआईपी सिटी मोहाली में अधिकतर नौकरी पेशा लोग या बिजनेसमैन रहते हैं। वहीं, अधिकतर लोगों के बच्चे यूके, कनाडा और आस्ट्रेलिया के अलावा अन्य देशोें में रह रहे हैं और वहीं कामकाज कर रहे हैं। ऐसे में उन लोगों का किसान आंदोलन से जुड़ना एक अच्छा प्रयास माना जा रहा है। इतना ही नहीं लोगों और युवाओं के इस जोश से काफी समय से ठंडे चल रहे कारों के असेसरी बाजार में भी तेजी आई है और लोगों को बढ़िया रोजगार मिल रहा है।
इस बारे में युवा मनवीर सिंह बब्बर का कहना है कि वे दो दोस्त हैं और उनके पास नए मॉडल की दो विदेशी कारें हैं। फिर भी उन्होंने पहले दिन से भारतीय किसान यूनियन के झंड़े अपनी कारों पर लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि बेशक हम लोग शहर में रहते हैं, लेकिन किसान परिवारों से संबंध रखते हैं। मोहाली के कई युवा ग्रुप किसानों का समर्थन शहर में रहकर ही कर रहे हैं। देश में रह कर भी विदेशी झंडे लगाने वाले यह युवा अब किसान संगठनों के झंडे लगा रहे हैं। विदेशी झंडों के प्रेमी इन युवाओं का अब कहना है कि किसानों को इस वक्त हमारे समर्थन की जरूरत है जिससे उनका हौसला बना रहे।
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इसी तरह वाहनों की नंबर प्लेट या स्टिकर कारोबार करने वाले अतुल मेहता का कहना है कि वह कई साल से इसी कारोबार में हैं। जब से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगना शुरू हुई है, तब से काम काफी कम हो गया था। ज्यादा युवा अपनी कारों के बैक साइड या दरवाजों पर शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर या पंजाबी सिंगरों के स्टिकर लगवाते थे। लेकिन जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, तब से अब किसान आंदोलन वालेे स्टिकर लगवाते हैं। इससे उनका कारोबार भी बढ़ा है।
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