डेराबस्सी के गांव त्रिवेदी कैंप के सरकारी स्कूल में सिलिंडर में लगी आग से झुलसी महिला।
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डेराबस्सी। गांव त्रिवेदी कैंप के सरकारी एलिमेंट्री स्कूल में मिड-डे मील का खाना बनाते हुए सिलिंडर को आग लग गई। इस दौरान खाना बना रही महिला बुरी तरह झुलस गई। हादसे के समय स्कूल में करीब 200 बच्चे मौजूद थे, जिन्हें अध्यापकों ने सुरक्षित बाहर निकाला। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाया गया, लेकिन इससे पहले ही स्कूल स्टाफ व गांव वासियों के सहयोग से आग पर काबू पा लिया था। गांव वासियों ने बताया कि यदि समय रहते आग पर काबू न पाया जाता या सिलिंडर फट जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
आग से झुलसी शिंदर कौर ने बताया कि वह रोजाना की तरह करीब 200 बच्चों के लिए गैस वाले सिलिंडर व लक्कड़ों के चूल्हे पर खाना बना रही थी। सिलिंडर का काम खत्म होने पर उसको बंद कर दिया, परंतु अचानक गैस लीक होने लगी। तभी सिलिंडर ने नजदीक जल रहे चूल्हे से आग पकड़ ली, जिसको बुझाते हुए वह झुलस गई। उसने शोर मचाया, जिसके बाद स्टाफ ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ देर में ही आग भड़क गई, जिस पर काबू पाने के लिए स्कूल स्टाफ ने बोरियों को गीला कर सिलेंडर पर डाला, लेकिन आग नहीं बुझी। स्कूल में मौजूद अग्निशमन यंत्र से भी कुछ देर में ही खत्म हो गया। आग बढ़ती देख फायर विभाग को जानकारी दी, जिनकी एक गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन इससे पहले ही आग पर काबू पा लिया था, हालांकि सिलेंडर से गैस लीक हो रही थी। जिस पर फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने पानी की बौछारें डाल कर काबू पाया। हादसे के समय पर शिंदर कौर के साथ दो और महिलाएं कर रही थीं, जो बाल-बाल बच गईं। हादसे बाद स्कूल में छुट्टी कर दी गई। इस स्कूल के साथ ही गांव का हाई स्कूल भी चलता है। दोनों स्कूल एक ही परिसर में बने हुए हैं। उस स्कूल में भी करीब 200 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। अगर सिलिंडर फट जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
केंद्र सरकार पूरे देश को लकड़ी के चूल्हों से मुक्त कर रही है, वहीं राज्य के सरकारी स्कूलों में अब तक इनका प्रयोग हो रहा है। इससे जहां प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं इसका धुआं खाना बनाने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।