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चंडीगढ़ के बाद मोहाली के डंपिंग ग्राउंड में लगी आग, सांस लेना हुआ मुश्किल

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मोहाली। चंडीगढ़ के डंपिंग ग्राउंड में लगी आग का मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं हुआ था, कि वीआईपी सिटी के डंपिंग ग्राउंड में भी आग लग गई। इस आग के कारण आसपास के निवासियों ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की है। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां दिन भर लगी रहीं। अभी यहां आग लगने के कारण का पता नहीं चल पाया है।
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फेज-8 के इंडस्ट्रियल एरिया में मोहाली के डंपिंग ग्राउंड में बने कूड़े के पहाड़ में रविवार की रात आग लग गई। यहां से उठे धुएं ने रिहायशी इलाके और आईटी पार्क में लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया। कूड़े के पहाड़ से उठते धुएं के कारण मोहाली में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। सोमवार को मोहाली में वायु प्रदूषण का स्तर 146 पीएम दर्ज किया गया। जबकि रविवार को वायु प्रदूषण का अधिकतम स्तर 88 पीएम दर्ज किया गया था। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोग काफी परेशान रहे। इससे आईटी पार्क में स्थित दफ्तरों में कर्मचारियों को काम करने में परेशानी हुई। डंपिंग ग्राउंड में लगी आग की सूचना मिलने पर नगर निगम हरकत में आया और इस पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की गईं। दिनभर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग पर काबू पाने में जुटी रहीं। धुएं पर काबू पाने के लिए डंपिंग ग्राउंड में लगे कूढ़े के पहाड़ पर मिट्टी डाली गई। जिससे कुछ राहत मिली। हालांकि रात तक डंपिंग ग्राउंड से धुआं उठता रहा।
आईटी पार्क और मिनार-ए-खालसा पर ग्रहण लगा रहा डंपिंग ग्राउंड
डंपिंग ग्राउंड रिहाइशी इलाके पास नहीं होना चाहिए। ऐसा नियम है, इसके बावजूद वीआईपी सिटी का डंपिंग ग्राउंड न सिर्फ रिहाइशी इलाके के करीब है, बल्कि इसके पास ही आईटी पार्क और चप्पड़चिड़ी की मिनार-ए-खालसा है। यह डंपिंग ग्राउंड इन दोनों पर ग्रहण लगा रहा है। मोहाली को उत्तर भारत का आईटी हब बनाने के लिए विकसित किए गए आईटी पार्क के लिए यह डंपिंग ग्राउंड अभिशाप साबित हो रहा है। देश के अन्य राज्यों सहित विदेशों से कारोबारी यहां आते हैं। इन लोगों को डंपिंग ग्राउंड की दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। इसी तरह चप्पड़चिड़ी में देश की सबसे उंची मिनार-ए-खालसा है। जिसे देखने के लिए देश विदेश से सैलानी पहुंचते हैं। इन सैलानियों का स्वागत भी डंपिंग ग्राउंड की दुर्गंध करती है।
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सीएम के एलान पर भी नहीं हटाया डंपिंग ग्राउंड
वर्ष 2020 के राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने का एलान किया था। डंपिंग ग्राउंड के लिए डेराबस्सी के पास समगोली में सरकार ने जगह अलॉट की है। सीएम की घोषणा के बाद भी डंपिंग ग्राउंड को अभी तक यहां से शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
खाद बनाने की योजना भी ठंडे बस्ते में
नगर निगम ने कूड़े से खाद तैयार करने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसके लिए दो मशीनें मंगवाई जानी थी। जिसके लिए बजट का प्रावधान भी रखा गया था। योजना थी कि कूड़े को मशीनों से छानकर खाद तैयार की जाएगी। बचे हुए कूड़े को रीसाइकिल किया जाएगा। यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई है।
परेशान हैं स्थानीय निवासी
फेज-8 में रहने वाले पंजाब गऊ सेवा कमीशन के सदस्य राजवंत राय शर्मा ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड में अकसर आग लगती रहती है। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के सुलगने से उठने वाला धुआं यहां के निवासियों के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। धुएं के कारण होने वाले प्रदूषण के चलते बीमारों, बच्चों व बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत की समस्या यहां आम हो चुकी है। इससे घातक बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
कोट्स
डंपिंग ग्राउंड में आग की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की गई। फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने के बाद सुलगते कूड़े से उठ रहे धुएं को रोकने के लिए मिट्टी डाली। फिलहाल हालात काबू में हैं। आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चला है। डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने की प्रक्रिया राज्य सरकार के स्तर पर होनी है। - डॉ. कमल गर्ग, नगर निगम कमिश्नर मोहाली
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