मोहाली। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सरहिंद फतेह को लेकर सोमवार को गुरुद्वारा चप्पड़चिड़ी से गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब तक फतेह-मार्च निकाला। श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया और पंज प्यारों की अगुवाई में फतेह-मार्च शुरू हुआ। इसमें धार्मिक सभाएं, टकसाल, सिंह सभाएं, बैंड और गतका पार्टियां, निहंग सिंह जत्थेबंदियां खालसाई जाहो-जलाल के साथ शामिल हुईं।
फतेह-मार्च चप्पड़चिड़ी यादगार, लांडरां चौक, चुन्नी, गुरुद्वारा ज्योति सरूप होता हुआ श्री फतेहगढ़ साहिब में संपन्न हुआ। रास्ते में जगह-जगह स्वागत गेट और लंगर लगाए गए थे। 12 मई 1710 को चप्पड़चिड़ी के मैदान में खालसाई फौजों ने वजीर खान को मार दिया था। 13 मई को बंदा सिंह बहादुर यहां से सरहिंद के लिए रवाना हुए थे। 14 मई को बाबा बंदा सिंह बहादुर की अगुवाई में पूरी तरह सरहिंद फतेह कर लिया गया। लंबी गुलामी के बाद पहली बार खालसा राज की स्थापना हुई थी। इसी उपलक्ष्य में यह फतेह मार्च निकाला गया।