जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि कुछ विभागों से रिपोर्ट मिली है। एसएसपी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ऐसी रैली में एकत्रित हुए लोगों व आम लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है। इससे शांति भंग होने का खतरा है। मोहाली जिले में बहुत से कश्मीरी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऐसी रैली उन्हें कोई जुर्म करने के लिए उकसा सकती है। एसएसपी ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर लोगों के इकट्ठे होने से ट्रैफिक व्यवस्था को खतरा हो सकता है। यह रैली एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड व इमरजेंसी वाहनों के लिए रुकावट खड़ी करेगी।
निगम ने रखा अपना यह तर्क
नगर निगम कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस रैली का रूट रिहायशी इलाकों से होकर गुजरता है। रैली वाले स्थान के पास ही फोर्टिस व कोस्मो जैसे अस्पताल पड़ते हैं। ऐसे में रैली को मंजूरी न दी जाए।
फायर ब्रिगेड ने भी किए हाथ खड़े
फायर अफसर ने बताया कि इतने कम समय में रैली वाले स्थान पर आग बुझाने वाले यंत्र मुहैया करवाना संभव नहीं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि उक्त रैली से जिले में जीवन व कानून व्यवस्था को गंभीर खतरा है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रैली प्रबंधकों ने लाउडस्पीकर लगाने की मंजूरी नहीं मांगी थी। न ही रैली वाले स्थान पर लाउडस्पीकर की मंजूरी के लिए आवेदन किया है।
कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के विरोध में थी रैली
यह रैली कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के विरोध में 15 सितंबर को होनी थी। रैली को लेकर चंडीगढ़ के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था। उसने कहा था कि रैली से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। जैसे ही मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। उसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब और चंडीगढ़ दोनों के डीजीपी को सुरक्षा की कमान संभालने के आदेश दिए थे।
साथ ही कहा था कि किसी भी कीमत पर जान माल का नुकसान नहीं होना चाहिए। उसके बाद 12 सितंबर को मोहाली जिला प्रशासन ने पूरे जिले में दस नवंबर तक धारा 144 लागू कर दी थी। इसके तहत धरने, रैलियों, प्रदर्शन, हड़ताल व नारेबाजी आदि पर पाबंदी लगा दी गई थी।