मोहाली। फेज-1 में होने वाली रामलीला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि यहां के लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा की पहचान बन चुकी है। करीब 35 साल से हो रहे इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ मंच पर भगवान राम, लक्ष्मण और रावण के किरदार निभा रही हैं। श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी द्वारा आयोजित इस रामलीला में शहर के कई परिवार ऐसे हैं, जो तीन पीढ़ियों से इससे जुड़े हैं। समिति के अध्यक्ष आशु सूद कहते हैं कि रामलीला मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। कई वर्षों तक मैंने श्रीराम की भूमिका निभाई और उस दौरान मेरे बेटे ने शत्रुघ्न का किरदार अदा किया। 90 के दशक में साधारण मंच, साधारण पोशाक और स्थानीय कलाकारों से शुरू हुई इस रामलीला ने आज भव्य रूप ले लिया है। समिति से जुड़े बुजुर्ग सदस्य बताते हैं कि उनके लिए रामलीला किसी त्योहार से कम नहीं। एक महीने तक चलने वाले अभ्यास से लेकर अंतिम दिन के रावण दहन तक, हर पल उन्हें अपने पूर्वजों और पुराने साथियों की याद दिलाता है।
परंपरा को आगे बढ़ा रही नई पीढ़ी
समिति के उपाध्यक्ष प्रतीक कपूर का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मोहाली की सांस्कृतिक धरोहर है। जब एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां मंचन से जुड़ी हों तो यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि परंपरा का जीवंत होना है।
वरिष्ठ कलाकार उपेंद्र सोढ़ी बताते हैं कि मैं और मेरा बेटा, दोनों कई सालों से रामलीला के मंच से जुड़े हुए हैं। एक अवसर पर मैं राजा दशरथ की भूमिका निभा रहा था और मेरा बेटा बाल्यकालीन लक्ष्मण का किरदार कर रहा था। यह अनुभव हमारे परिवार के लिए बेहद खास और यादगार रहा।
दादा-पिता से प्रेरणा लेकर निभा रहे किरदार
कलाकार ध्रुव राज कोचर कहते हैं कि मेरे पिताजी और दादाजी ही नहीं, बल्कि मेरे चाचा जी भी रामलीला से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। बचपन में जब पिताजी लक्ष्मण और परशुराम की भूमिका निभाते थे तो मैं उनसे बहुत प्रेरित होता था। उनसे सीखकर ही मैंने भी लक्ष्मण और परशुराम के किरदार निभाए हैं। यह मेरे लिए गर्व की परंपरा है।