कुलवंत सिंह के लिए यह पहला मौका नहीं है, जब उन्हें किसी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2014 में लोकसभा चुनाव में वह अकाली दल के उम्मीदवार के रूप में फतेहगढ़ साहिब से चुनावी मैदान में उतरे थे। चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद जब 2015 में नगर निगम मोहाली के चुनाव हुए तो अकाली दल ने उन्हें दरकिनार कर अन्य नेताओं को महत्ता दी। इसके बाद उन्होंने अकाली दल से बगावत कर आजाद ग्रुप बनाया था।
उनका आजाद ग्रुप उस चुनाव में दस सीटें हासिल कर पाया था। इसके बाद कांग्रेस और आजाद ग्रुप मिल गए थे। साथ ही वे मोहाली नगर निगम के पहले मेयर बने थे। इस चुनाव से ठीक पहले भी 2015 वाले हालात बने थे। कुलवंत सिंह ने अकाली दल को अलविदा कर आजाद ग्रुप बनाया था। आजाद ग्रुप करीब 11 सीटें जीतने में कामयाब रहा है। कुलवंत सिंह 1995 में पहली बार वार्ड नंबर से 21 से पार्षद चुने गए थे। साथ ही उस समय मोहाली नगर परिषद होती थी। उसके वह वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने। वह 2000 से 2005 तक परिषद के अध्यक्ष बने रहे।