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पंजाब की सड़कों पर रोजाना 12 लोग गंवा रहे जान

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मोहाली। पंजाब की सड़कों पर रोजाना 12 लोग हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। देश में सड़क हादसों में प्रतिदिन 415 लोग मौत का शिकार हो जाते हैं। मरने वाले पुरुषों में से 86 प्रतिशत युवा (उम्र 25 से 35 वर्ष) हैं। वहीं 14 प्रतिशत महिलाएं सड़क हादसों में अपनी जान गंवाती हैं। सड़क हादसे में परिवार के मुखिया के बाद परिवारों के गरीबी रेखा से नीचे जाने का आंकड़ा भी काफी भयावह है। संयुक्त राष्ट्र का सड़क सुरक्षा दशक इस साल खत्म हो जाएगा। सड़क हादसों में 50 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि हादसों के ग्राफ में कमी नहीं आ रही है।
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पंजाब सरकार के ट्रैफिक एडवाइजर नवदीप असीजा ने सड़क हादसों को लेकर आंकड़े जारी किए। पंजाब के एडीजीपी ट्रैफिक डॉ. शरद सत्य चौहान ने इसका समाधान बताते हुए कहा कि जापानियों ने ट्रैफिक कल्चर को आत्मसात करते हुए नियम तोड़ने के बजाय उनके पालन को प्राथमिकता दी। इसकी वजह से वहां सड़क हादसों का ग्राफ काफी कम है, जो एक मिसाल है। डॉ. चौहान ने बताया कि सड़क हादसे में परिवार के मुखिया की मौत होने से शहरी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत परिवार और ग्रामीण इलाकों के 50 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं। एडीजीपी ने इसे सड़क हादसों का सबसे दुखद पहलु मानते हुए कहा कि इस बारे में सबसे कम बात होती है।
वाघा बॉर्डर पर 50 हजार लोगों ने शपथ लेकर बनाया रिकार्ड
31वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान कई संगठनों ने मिलकर इंडियाअगेंस्टरोडक्रैश हैशटैगआईएआरसी2020 शीर्ष के साथ अभियान शुरू किया है। इसकी शुरुआत परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने की है। इसमें ड्राइव स्मार्ट ड्राइव सेफ ऑफ सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, सीआईआई, हेला इंडिया लिमिटेड सहित अन्य संगठन शामिल हैं। इस अभियान की शुरुआत 11 जनवरी को अटारी-वाघा बॉर्डर से हुई। जहां लगभग 50 हजार लोगों ने एक साथ सड़क सुरक्षा की शपथ ली, जोकि अपने आप में एक रिकार्ड है। देश के विभिन्न हिस्सों में रोटरी क्लब, स्कूल और कॉलेजों को इस अभियान में शामिल किया जा रहा है।
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