मोहाली। एक कामगार की मौत के मामले में फेज-7 के ईएसआई अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों का खंडन किया है। मोहाली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (एमआईए) इस मामले को एसएसपी सतिंदर सिंह तक ले गई और जांच की अपील की है। एमआईए ने सुभाष पांडे नाम के इस कामगार की मौत के कारणों की जांच करवाने की मांग की है।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 स्थित ईएसआई अस्पताल में शुक्रवार शाम सुभाष पांडे नामक कामगार को इलाज के लिए भर्ती करवाया गया था। सुभाष पांडे बलौंगी की आंबेडकर कॉलोनी में रहता था और इंडस्ट्रियल एरिया की 105 नंबर फैक्ट्री में काम करता था। शुक्रवार शाम काम के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ी तो ईएसआई अस्पताल लाया गया। सुभाष पांडे की मौत के लिए ईएसआई अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। एमआईए के लेबर लॉ कमेटी के चेयरमैन जसबीर सिंह व जनरल सेक्रेटरी राजीव गुप्ता ने एसएसपी सतिंदर सिंह ने मुलाकात कर अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाकर मौत के कारणों की जांच करवाने की अपील की है।
सुभाष पांडे को अस्पताल ले जाने वाले फैक्ट्री के फोरमैन श्याम चौधरी के मुताबिक ईएसआई अस्पताल पहुंचने पर वहां ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर ने तेज बुखार होने की बात कही थी। चौधरी के अनुसार डाक्टर ने सुभाष पांडे को इंजेक्शन तो दिया, लेकिन विस्तृत जांच नहीं की। श्याम चौधरी के मुताबिक एक घंटे बाद डाक्टर ने उन्हें बताया कि मरीज की हालत बिगड़ रही है, लिहाजा उसे चंडीगढ़ सेक्टर 16 अस्पताल ले जाना होगा। डाक्टर ने उन्हें एंबुलेंस का प्रबंध करने को कहा। श्याम चौधरी ने एसएसपी को दिए अपने बयान में कहा कि एंबुलेंस के लिए फोन करने पर रैफरेंस नंबर मांगा गया, जिसे देने से डॉक्टर ने इनकार कर दिया। इसके बाद डाक्टर ने खुद ही फेज 1 के एक निजी अस्पताल से एंबुलेंस मंगवाकर मरीज को वहां ले जाने के लिए कहा। श्याम चौधरी ने कहा कि जब सुभाष को एंबुलेंस में लाया गया, तब उसके शरीर में किसी तरह की हलचल नहीं थी। फेज 1 के निजी अस्पताल पहुंचने पर वहां के डाक्टर्स ने सुभाष पांडे को मृत घोषित कर दिया।
एमआईए ने एसएसपी को दी गई शिकायत में ईएसआई अस्पताल पर सही इलाज न करने का गंभीर आरोप लगाया है, कि अगर सुभाष को अस्पताल पहुंचने पर सही जांच करके इलाज किया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
उधर, ईएसआई अस्पताल ने आरोपों का खंडन किया है। एसएमओ डॉ. मनजीत कौर ने कहा कि सुभाष के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई। मरीज को शाम साढे़ 4 बजे इमरजेंसी में लाया गया था और डाक्टर ने जांच कर जरूरी इलाज शुरू कर दिया था। मरीज को लगातार मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे। मरीज की हालत बिगड़ने पर पौने 5 बजे उसे रैफर कर दिया गया था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।