ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के फेज-8 स्थित पुडा भवन में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई 24 घंटे बाद भी जारी है।
मंगलवार सुबह करीब नौ बजे शुरू हुई जांच के तहत दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर एक साथ सर्च और सर्वे किया जा रहा है। ईडी की टीमें गमाडा कार्यालय में रातभर रिकॉर्ड खंगालती रहीं। इस दौरान गमाडा मुख्यालय के तीन हिस्सों को सील किए जाने की जानकारी है।
ईडी की जांच तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों को गमाडा की दो प्रमुख नीलामी साइटों के मामले में कथित वित्तीय राहत दिए जाने से जुड़ी है। एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया से संबंधित कंपनियों को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कथित अनुचित लाभ हुआ और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
प्रमोटर्स और उनसे जुड़ी कंपनियां भी जांच के दायरे में
ईडी के मुताबिक पीएमएलए के तहत की जा रही कार्रवाई में तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है। रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स, एमबी इंफ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े परिसर भी जांच के दायरे में हैं।
जांच एजेंसी गमाडा और पंजाब सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक टीमों का मुख्य फोकस गमाडा और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेन-देन, नीलामी प्रक्रिया और बाद में भुगतान में दी गई कथित वित्तीय राहत से जुड़े दस्तावेजों पर है। गमाडा मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
दो नीलामी साइटों की खरीद के बाद भुगतान में राहत का आरोप
ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर्स रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स और एमबी इंफ्राबिल्ड समेत कुछ अन्य कंपनियों को भी नियंत्रित करते हैं। इन कंपनियों ने मोहाली में गमाडा की दो प्रमुख नीलामी साइटें खरीदी थीं। आरोप है कि बाद में गमाडा को किए जाने वाले भुगतान में इन कंपनियों को बड़ी वित्तीय राहत मिली। इसी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उससे हुए आर्थिक लाभ की जांच की जा रही है।
फिलहाल ईडी की ओर से मामले में किसी गिरफ्तारी या अंतिम निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय राहत किस प्रक्रिया के तहत दी गई और इसमें किन अधिकारियों अथवा निजी कंपनियों की भूमिका रही।