न्यू चंडीगढ़ स्थित सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में फर्जी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मंजूरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के दफ्तर तक पहुंच गई है। मंगलवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) की टीम ने गमाडा कार्यालय में दबिश देकर कई घंटे तक रिकॉर्ड खंगाला। कार्रवाई के दौरान प्रोजेक्ट से जुड़ी सीएलयू मंजूरियों, जमीन के रिकॉर्ड और अप्रूवल प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। 348 करोड़ रुपये की अवैध आय के मामले में खबर लिखे जाने तक ईडी की रेड जारी थी।
सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीम तीन गाड़ियों में गमाडा कार्यालय पहुंची। तलाशी के दौरान कार्यालय के दो फ्लोर खाली करा दिए गए। अधिकारियों और कर्मचारियों को तलाशी पूरी होने तक संबंधित हिस्से से बाहर रहने के लिए कहा गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि गमाडा के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन ईडी ने अपने कब्जे में लिए। चीफ इंजीनियर का कार्यालय सील किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
प्लानिंग, एस्टेट और इंजीनियरिंग अधिकारियों से पूछताछ
ईडी की टीम ने गमाडा की प्लानिंग, एस्टेट और इंजीनियरिंग शाखाओं से जुड़े अधिकारियों से सनटेक सिटी प्रोजेक्ट की मंजूरियों को लेकर पूछताछ की। अधिकारियों से यह जानकारी ली गई कि प्रोजेक्ट के लिए सीएलयू की प्रक्रिया कब और किस आधार पर शुरू हुई, किन अधिकारियों ने फाइलों पर कार्रवाई की और बाद में मंजूरियों या लेआउट में क्या बदलाव किए गए। जांच टीम ने जमीन अधिग्रहण, सीएलयू अनुमति, निजी डेवलपर्स को दी गई मंजूरियों और प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदेन से संबंधित फाइलें और दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान कई अधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ किए जाने की जानकारी है।
फर्जी सहमति पत्रों से सीएलयू लेने का आरोप
ईडी की जांच का एक प्रमुख आधार आरोप है कि सनटेक सिटी प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी हासिल करने में जमीन मालिकों के कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान वाले सहमति पत्र इस्तेमाल किए गए। एजेंसी यह भी जांच रही है कि इन दस्तावेजों के आधार पर सीएलयू और अन्य सरकारी मंजूरियां किस तरह हासिल की गई। जांच में कथित तौर पर प्रोजेक्ट से होने वाली आय और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल को भी देखा जा रहा है। ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।