मोहाली। फेज-6 के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। स्टाफ और मशीनों की कमी की वजह से एक हफ्ते से ज्यादा का समय दिया जा रहा है। इस प्रकार अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी जरूरी जांच समय पर नहीं होने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की पर्ची पर अल्ट्रासाउंड लिखे जाने के बावजूद अस्पताल में जांच नहीं की जा रही है। उन्हें बाहर निजी केंद्रों पर भेज दिया जाता है। सरकारी अस्पताल में सस्ती और सुलभ जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को मजबूरी में महंगे दामों पर निजी लैब में जांच करवानी पड़ रही है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि इलाज में भी देरी हो रही है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं होने के बावजूद उनका सही उपयोग नहीं हो रहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जांच सेवाओं को दुरुस्त किया जाए और मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर न भेजा जाए। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोले मरीज
कुछ दिन पहले डॉक्टर को दिखाया था, उन्होंने अल्ट्रासाउंड लिख दिया था। जब अल्ट्रासाउंड करवाने गई तो स्टाफ ने मना कर दिया और बाहर से करवाने को कहा। जो जांच यहां करीब 200 रुपये में हो सकती थी, उसके लिए मुझे 2700 रुपये खर्च करने पड़े। - निशा, बड़माजरा
सुबह सात बजे से एक्स-रे के लिए अस्पताल में बैठी थी, लेकिन पूरा दिन निकल गया और जांच नहीं हो सकी। बाद में मुझे एक हफ्ते बाद की तारीख दे दी गई। ऐसे में अन्य मरीजों को भी बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। - अमन कौर, मटौर
मशीन और स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को जांच के लिए लंबी तारीखें देनी पड़ती हैं। जिन मामलों में इमरजेंसी होती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तुरंत अस्पताल में ही किया जाता है। अन्य मामलों में मरीजों को आगे की तारीख दी जाती है। -डॉ. अमित अग्रवाल, सिविल अस्पताल, फेज-6