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मौत के बाद परिवार ने शरीर पीजीआई को किया दान

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खरड़। तर्कशील इकाई के नेता सुरिंदर सिंबलमाजरा के पिता बलदेव सिंह की मौत के बाद उनके परिवार की ओर से मृतक के शरीर को खोज कार्यों के लिए पीजीआई के अनाटमी विभाग को सौंप दिया गया है। इस अवसर पर तर्कशील नेता प्रिंसिपल गुरमीत ने कहा कि परिवार के इस फैसले से मेडिकल साइंस को बीमारियों के कारण और इलाज ढूंढने में मदद मिलेगी। आज के वैज्ञानिक युग में मृतक मनुष्य शरीर मेडिकल साइंस के लिए बहुत ही कीमती वस्तु है। इसे धरती में दबाकर या आग में जलाकर या किसी अन्य तरीके से नष्ट नहीं करना चाहिए।
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इस अवसर पर तर्कशील नेताओं कुलविंदर नगारी, लैक्चरार सुरजीत मोहाली और जोगा सिंह ने कहा कि मृतक शरीर को जलाने या दफनाने का कार्य हर एक क्षेत्र के भौगोलिक हालातों के कारण शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि जहां लकड़ी अधिक होती थी वहां के निवासियों ने मृतक शरीर को जलाना शुरू कर दिया और जहां रेगिस्तान क्षेत्र में, जहां पेड़ नहीं होते थे, वहां के निवासी मृतक शरीर को दबाने लगे। वहीं नदी आदि के किनारों पर रहने वाले लोगों को शव का जल प्रवाह करना अच्छा लगा। इस तरह यह सभी तरीके लोगों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार अपनाए और इनके साथ धार्मिक मान्यताएं तो बहुत समय बाद जुड़ीं।
उन्होंने कहा कि जब मृतक शरीर का कोई उपयोग नहीं होता था, तो लोगों के पास इसे नष्ट करने के अलावा कोई चारा नहीं था। लेकिन आज साइंस की तरक्की के कारण मनुष्य शरीर पर कई तरह के खोज कार्य चल रहे हैं। अब मृतक शरीर को किसी भी तरह नष्ट करने के बजाय इसे खोज कार्यों के लिए देकर मेडिकल साइंस की तरक्की में अपना योगदान देना चाहिए।
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इस अवसर पर सुरिंदर सिंबलमाजरा ने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक जीव होने के कारण जन्म से लेकर मौत होने तक अपनी सभी जरूरतें समाज से पूरी करता है, इसलिए समाज भलाई में अपना योगदान देना भी हमारा फर्ज बनता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के युग में हजारों साल पुरानी धारणाओं को छोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है। इस मौके पर विक्रमजीत सोनी, सुजान बडाला और हरमिंदर पमौर आदि उपस्थित थे।
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