बनूड़। किसानों की ओर से की जाने वाली धान की फसल पर अचानक बीमारियों का हमला होने के कारण किसानों की फसल गेहूं की तरह धान की आमद भी कम होने की उम्मीद है। क्षेत्र में सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनकी फसल के पौधे विकसित नहीं हुए और पत्ते भी पीले पड़ गए हैं। फसल पर बीमारी का हमला होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, किसानों ने धान की फसल के लिए 45 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर ली, जिससे उन्हें मुनाफे की उम्मीद थी। लेकिन फसल के खराब होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
इस संबंधी किसान नेता बलबंत सिंह नडियाली ने सरकार से मांग की है कि जिन कंपनियों ने कथित तौर पर किसानों को घटिया बीज और दवाइयां दी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जबकि घटिया बीज और दवाइयों के कारण किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इससे किसान दुखी होकर धान की फसल को खेतों में ही नष्ट कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान संगठनों ने चेेतावनी दी है कि अगर घटिया बीज और दवाइयां मुहैया करवाने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह संघर्ष करेंगे।
गांव हुंबड़ा के किसान स्वर्ण सिंह ने बताया कि अपने खेत में इस बीमारी से ग्रस्त दो एकड़ धान की फसल को नष्ट कर चुके हैं और तीन एकड़ ओर धान की फसल को नष्ट करने की तैयारी में हैं। जबकि पीआर 131 धान की किस्म कृषि यूनिवर्सिटी से प्रमाणित बाजवा सीड स्टोर शंभू से खरीदा था और करीब पांच एकड़ में बीज को लगाकर खेती की। लेकिन उनकी फसल अच्छी तरह बढ़ते-बढ़ते अचानक बीमारी का शिकार होकर खराब हो गई। इसी तरह, नंबरदार हरपाल सिंह बठलाना की 5 एकड़, बिंदर सिंह सनेटा की तीन एकड़, मीत राम सनेटा की दो एकड़, लखमीर सिंह पंच, गुरप्रीत सिंह मनौली सूरत की पांच एकड़ के अलावा अन्य किसानों की फसल खराब हो गई है।
इस पर किसानों ने सीएम भगवंत सिंह मान से मांग की है कि घटिया बीज और दवाई की वजह से खराब हुई फसल का मुआवजा देने के लिए तुरंत गिरदावरी के आदेश जारी किए जाएं और उन्हें प्रति एकड़ 50 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा जारी किया जाए।