मोहाली। शहर में एक अलग और पूर्ण रूप से संचालित सिविल अस्पताल की मांग एक बार फिर उठी है। पूर्व डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने आरोप लगाया है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स मोहाली) के अधीन जाने के बाद आम मरीजों को रियायती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से मोहाली में एक अलग सिविल अस्पताल स्थापित करने की मांग की है।
बेदी ने कहा कि मोहाली को अंतरराष्ट्रीय शहर और आईटी हब कहा जाता है, लेकिन यहां आज भी पूरी तरह कार्यरत सिविल अस्पताल नहीं है। उनका कहना था कि सरकार को पुराने सिविल अस्पताल को बंद करने के बजाय मेडिकल कॉलेज का विस्तार करना चाहिए था। इससे आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होतीं और मेडिकल शिक्षा भी सुचारु रूप से चलती। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज के अधीन अस्पताल संचालित होने से कई जांचों और उपचार की फीस बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक असर गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। खरड़, डेराबस्सी, जीरकपुर और जिले के हजारों लोग भी इस अस्पताल पर निर्भर हैं।
अन्य सुविधाओं का अभाव और मांगें
बेदी ने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त हॉस्टल, लाइब्रेरी और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मातृ-शिशु केंद्र का उद्घाटन होने के बावजूद अब तक आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की कि मोहाली में जल्द अलग सिविल अस्पताल बनाया जाए। आम मरीजों के लिए पहले जैसी रियायती स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल की जाएं और बंद पड़े मातृ-शिशु केंद्र को शीघ्र शुरू किया जाए। बेदी ने इसे पूरे जिले के लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।