मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के मामले में नामजद पूर्व अकाली मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की तीन याचिकाओं पर मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में एक याचिका मजीठिया की जमानत पर लगी थी। जमानत याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पर 25 जुलाई को बहस होगी।
दो अन्य याचिकाएं जिनमें मजीठिया की जेल में बैरक बदलने व ग्राउंड ऑफ अरेस्ट संबंधी थी। मजीठिया को अदालत में विजिलेंस ने पेश नहीं किया वह 2 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में नाभा जेल में बंद हैं। मजीठिया की ओर से उनके वकील अर्षदीप सिंह कलेर पेश हुए थे जबकि सरकारी पक्ष की तरफ से स्पेशल पीपी फैरी सौफत और प्रीत इंदरपाल सिंह पेश हुए थे। बाद दोपहर ढाई बजे इन याचिकाओं पर बहस शुरु हुई जो करीब दो घंटे चली।
एडवोकेट कलेर ने कहा कि तीसरी याचिका बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की जमानत पर लगी थी जिस पर दो घंटे अदालत में बहस हुई। इस याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, इस याचिका पर 25 जुलाई को दोबारा से बहस होगी। कलेर ने अदालत से बाहर आकर बताया कि मजीठिया की जमानत के लिए स्टेट को नोटिस जारी हुआ था। एडवोकेट कलेर ने कहा कि विपक्ष अब तक यह कहते आ रहा था कि उन्होंने सबूतों के आधार पर मजीठिया पर मामला दर्ज किया है लेकिन आज अदालत में उन्होंने यह कहते हुए समय मांगा कि उनसे अभी रिप्लाई नहीं बना है, उन्हें एक हफ्ते का समय दिया जाए।
वह सभी सबूतों को लिखित तौर पर कोर्ट में पेश करेंगे। इसका एडवोकेट कलेर ने अदालत में विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि विपक्ष इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं और एफिडेविट पर यही सब बातें लिखकर आए हैं। उनका यह एफिडेविट रिजेक्ट हो गया है। अदालत ने दलील सुनने के बाद विपक्ष को जवाब देने के लिए दो दिन यानि 25 जुलाई तक का समय दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि विजिलेंस 25 जुलाई से पहले अपने जवाब का कापी डिफेंस काउंसिल को भी मुहैया करवाए। मजीठिया की जमानत पर सुनवाई अब 25 जुलाई को होगी।
सरकारी वकील ने कहा कि बैरक बदलने की याचिका पर अदालत को बताया गया कि मजीठिया की ओर से जेल अधीक्षक को ऐसी कोई शिकायत नहीं दी गई है और जेल में उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। अदालत ने उनके जवाब की कॉपी एडीजीपी जेल को सौंपकर जेल नियमों के बारे में जवाब मांगा है। वहीं, अदालत को बताया कि ग्राउंड ऑफ अरेस्ट और जेल नियमों की कॉपी विपक्ष को पहले ही दी जा चुकी है। मजीठिया की जमानत याचिका पर उनका जवाब था कि बेल एप्लीकेशन 630 पेजों की है जिसका जवाब देने में समय लगता है।