पंजाब में ऑनलाइन धमकी देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में पांच दिनों के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में कुल 4.61 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
इनमें से एक मामले में आरएसएसबी ब्यास के कर्नल धर्म सिंह बैदवान से 1.21 करोड़ रुपये ठगे गए हैं। इससे पहले खन्ना निवासी गुरनाम सिंह से 3.40 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी।
पंजाब स्टेट साइबर क्राइम थाना फेज-4 मोहाली ने दोनों मामलों में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अब बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की गहन जांच में जुट गई है। कर्नल धर्म सिंह बैदवान ने अपनी शिकायत एनसीआरपी पर दर्ज कराई थी। यह शिकायत ई-जीरो एफआईआर पोर्टल के माध्यम से स्टेट साइबर क्राइम थाने पहुंची।
उन्होंने आरोप लगाया कि अज्ञात लोगों ने उन्हें ऑनलाइन धमकियां दीं। नुकसान पहुंचाने का डर दिखाकर उनसे 1.21 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। यह वित्तीय धोखाधड़ी पंजाब क्षेत्र में हुई है। गुरनाम सिंह के मामले में भी अज्ञात लोगों ने ऑनलाइन धमकाकर और डराकर अलग-अलग समय पर 3.40 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाए थे।
पुलिस ने गुरनाम सिंह के मामले में बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 308 और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत कार्रवाई की थी। दोनों मामलों में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं ने करोड़ों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगाया है।
जांच का दायरा और तरीका कर्नल धर्म सिंह बैदवान के मामले में पुलिस शिकायत की सत्यता की जांच करेगी। इसके साथ ही वित्तीय लेनदेन की पूरी ट्रेल खंगाली जाएगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि 1.21 करोड़ रुपये किन खातों में ट्रांसफर हुए। वहां से रकम आगे किन खातों में भेजी गई और आखिरकार पैसा कहां पहुंचा। धमकियों के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की भी जांच होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एप या अन्य डिजिटल माध्यमों की भी पड़ताल की जाएगी। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सुखविंदर कौर ने बताया कि पुलिस शिकायतकर्ता का बयान बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दर्ज करेगी। बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
समान तरीका और नेटवर्क की आशंका
दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं ने ऑनलाइन धमकी और डर दिखाकर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाए जाने का आरोप लगाया है। ऐसे में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दोनों घटनाओं के पीछे कोई समान गिरोह या नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। हालांकि दोनों मामलों के बीच किसी सीधे संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वित्तीय और डिजिटल ट्रेल की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा। इससे पता चलेगा कि रकम किस नेटवर्क तक पहुंची और ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं। यह जांच साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सकती है।
अधिक जटिल है साइबर ठगी की जांच करना
ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच सामान्य आपराधिक मामलों से अधिक जटिल होती है। साइबर अपराधी ठगी की रकम को तेजी से कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। यह रकम देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच जाती है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसे की पूरी ट्रेल को समय रहते पकड़ना और रकम को फ्रीज कराना है। आरोपी की गिरफ्तारी ही सफलता नहीं है। बड़े साइबर गिरोहों की जांच में अक्सर एक से ज्यादा राज्यों की पुलिस शामिल होती है। इसलिए संयुक्त जांच टीम और राज्यों के बीच तेज समन्वय जरूरी है।
- मोहिंदर सिंह, साइबर विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त मोहाली
साइबर पुलिस की एडवाइजरी
साइबर पुलिस ने आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। ऑनलाइन धमकी या डराने वाले कॉल पर घबराएं नहीं। यदि सामने वाला खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताए तो तुरंत विश्वास न करें। किसी भी हालत में पैसे ट्रांसफर न करें, क्योंकि कोई सरकारी एजेंसी ऑनलाइन भुगतान नहीं मांगती। बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, सीवीवी, पासवर्ड और यूपीआई पिन किसी से साझा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई एप डाउनलोड या स्क्रीन शेयर न करें। धमकी वाले मैसेज, कॉल रिकॉर्डिंग, चैट, मोबाइल नंबर और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
पुलिस शिकायतकर्ता का बयान बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दर्ज करेगी। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
- इंस्पेक्टर सुखविंदर कौर, जांच अधिकारी